फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सूखे से ‘सूखे’ बुरांश के फूल

Sat, 23 Apr 2016 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/डीडीहाट
विज्ञापन
बुरांश के फूल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
इस बार सूखे की वजह से जंगलों में बुरांश के फूल लगभग गायब हो गए हैं। बुरांश का जूस बनाकर आजीविका चलाने वाले लोगों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उद्यान विभाग के फल प्रसंस्करण विभाग में इस बार बुरांश का जूस नाममात्र का बन पाया।
विज्ञापन


जिला उद्यान अधिकारी डा. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि पिछले साल तक उनका प्रसंस्करण विभाग 250 लीटर बुरांश का जूस तैयार करता था। इस बार यह मात्रा घटकर मात्र 50 लीटर में सिमट गई है। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग बुरांश के जूस की बिक्री नहीं करता वह सिर्फ लोगों द्वारा एकत्र फूलों से जूस तैयार कर उनको दे देता है। डा. मीनाक्षी ने बताया कि इस बार बुरांश के जितने भी फूल उपलब्ध हुए, उनमें रस की मात्रा बहुत कम थी। इस बार ग्रामीण अंचलों से बुरांश का जूस तैयार कराने वाले बहुत कम संख्या में आए। 

उधर, डीडीहाट में बुरांश का जूस बनाने का काम करने वाले चंद्र सिंह नित्वाल ने बताया कि पिछले साल तक वह 200 लीटर जूस तैयार करते थे। इसकी बिक्री 100 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से की जाती थी। इस बार उन्होंने अब तक सिर्फ 20 लीटर जूस तैयार किया है और अब उनके पास बुरांश का मात्र दो लीटर जूस बचा है। कुछ लोग इस जूस की कीमत पांच सौ रुपये प्रति लीटर तक देने को तैयार हैं। बुरांश का जूस हृदय रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है। इसके अलावा यह गर्मियों में सबसे बेहतरीन स्थानीय पेय है। नित्वाल ने बताया कि नारायणनगर, मिर्थी, भनड़ा, सानदेव, जौरासी समेत सभी जंगलों में बुरांश के फूल इस बार कम मात्रा में खिले। जो फूल संग्रह कर लाए गए उनमें रस बिल्कुल नहीं निकला। उन्होंने बताया कि इस बार बुरांश कम खिलने से उनको लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
विज्ञापन


कैलास यात्रियों के स्वागत को नहीं मिलेगा जूस
बुरांश के जूस का उत्पादन कम होने से इस बार कैलास मानसरोवर यात्रियों को स्वागत के समय जूस दे पाना संभव नहीं होगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम के पिथौरागढ़ आवासगृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि पिछले साल तक यात्रियों के लिए कम से कम 80 लीटर बुरांश का जूस रखा जाता था। इस बार जूस मिलना मुश्किल हो गया है। यात्री दल जब टीआरसी में पहुंचता है तब उनको बुरांश का जूस देने की परंपरा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें