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सूखे और ठंड से गिरने लगा दूध का उत्पादन

Thu, 14 Jan 2016 10:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,मुनस्यारी /पिथौरागढ़
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सूखे की स्थिति और ठंड के कारण इस बार दूध का उत्पादन गिर गया है। इस सीजन में बारिश होने पर लोग खेतों की निराई करते थे। निराई के समय निकली हरी घास जानवरों के चारे के काम आती थी, लेकिन इस बार लंबे समय से बारिश न होने के कारण जानवरों के लिए हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं, ठंड के कारण भी जानवरों के दूध में कमी आने लगी है।
दुग्ध संघ के अधिकारियों का कहना है कि नवंबर, दिसंबर में अच्छी बारिश होने पर जानवरों के लिए हरी पत्तियां, घास और निराई के समय निकलने वाली पत्तियां काम आ जाती थी, यदि समय पर बारिश हो तो जंगलों में भी चरने के लिए हरी घास मिल जाती थी।
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इस बार मौसम ने सारी स्थितियों को प्रतिकूल कर दिया है। इसका सीधा असर दूध के उत्पादन पर पड़ रहा है। दुग्ध संघ के अध्यक्ष विनोद कार्की ने बताया कि पिछले साल तक जाड़ों के सीजन में 6000 लीटर दूध का प्रतिदिन संग्रह किया जाता था। अन्य मौसम में दूध का संग्रह 5500 लीटर हुआ करता था, लेकिन इस बार जाड़ों में दूध की मात्रा बढ़ने के बजाए कम हो गई है।
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 इस समय सभी दुग्ध समितियों से मिलाकर मात्र 5000 लीटर दूध का संग्रह हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह जाड़ों में पिछले साल की तुलना में एक हजार लीटर दूध कम हो गया है। निजी तौर पर दुग्ध व्यवसाय करने वालों ने भी यही बताया कि इस समय दूध का संग्रह कम से कम दस फीसदी तक गिर गया है, यदि बारिश नहीं होती है तो दूध की मात्रा और गिर जाएगी।
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