सीमांत जिले में आठूं का पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने सों घास से महेश्वर का विग्रह बनाया और शगुन के गीत गाकर गौरा-महेश्वर का विवाह कराया। महिलाओं ने गले में दूबधागा धारण कर परिवार की सुख-शांति की कामना की।
रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आठूं पर्व पर सेरा, खड़कोट की महिलाओं ने भगवान महेश्वर का विग्रह तैयार किया। झांकी घंटाकरण, सिल्थाम, गांधी चौक, सिमलगैर होते हुए रामलीला मैदान पहुंची। झांकी के आगे विवेकानंद विद्या मंदिर के बच्चे छलिया नृत्य करते हुए चल रहे थे। सोर वैली पब्लिक स्कूल की छात्राएं कलश यात्रा में शामिल रहीं। बाद में महेश्वर की प्रतिष्ठा की गई। महेश्वर की पूजा-अर्चना के बाद मानस एकेडमी के बच्चों ने हिलजात्रा का मंचन किया। महिलाओं ने खोल दे माता खोल भवानी धार में किवाड़ आदि झोड़ा-चांचरी किए।
इस मौके पर पुष्पा गुरुरानी, प्रेमा उप्रेती, पुष्पा पुनेठा, दुर्गा बिष्ट, रीता सामंत, शोभा अवस्थी, रेनू भट्ट, आरती सामंत, संगीता सौन, हेमलता अवस्थी, भगवती अवस्थी, आशा पुनेठा, भावना जोशी, मीना द्विवेदी, पूर्व पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा, नवीन भट्ट, दीपक नगरकोटी आदि थे। उधर, कुमौड़ गांव में महिलाओं और बालिकाओं ने झोड़ा-चांचरी का आयोजन किया। गौरा-महेश की धूमधाम से शादी कराई। बाद में फॉल फटक कर फल लिया। इस मौके पर कुंडल सिंह महर, अनूप सिंह महर, कल्याण सिंह, प्रकाश सिंह, चंद्रशेखर महर, प्रेम सिंह बिष्ट, देवराज सिंह, दीपक मेहता, गोपाल सिंह, रविंद्र महर आदि थे।
डीडीहाट। नगर से लगे हाटथर्प, भनड़ा, धौलेत, सिटोली, मिर्थी, नारायणनगर, ओगला सहित दर्जनों ग्राम सभाओं में गौरा-महेश्वर पूजन के साथ आठूं का पर्व शुरू हो गया है। धौलेत के प्रकाश बोरा बताते हैं कि शाम ढलते ही महिला-पुरुष मंदिरों में एकत्रित हो जाते हैं और देर रात तक झोड़ा चांचरी का आयोजन चलता है। भनड़ा में आठूं का पर्व विधि-विधान से शुरू हो गया है। एक सप्ताह तक चलने वाले इस महोत्सव में झोड़ा-चांचरी के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है।
सातूं-आठूं महोत्सव 20 से
थल। मुवानी में दो दिनी सातूं-आठूं महोत्सव 20 अगस्त से होगा। इसमें ठुलखेल, चांचरी, हिरन चीतल और हिलजात्रा का आयोजन किया जाएगा। सांस्कृतिक मंच मुवानी घाटी के संयोजक राम सिंह राठौर ने क्षेत्रीय जनता से महोत्सव में पहुंचने का आह्वान किया है।