फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डा.टोलिया ने 35 वर्ष तक बतौर आईएएस अफसर की यूपी, उत्तराखंड की सेवा

Tue, 06 Dec 2016 09:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/मुनस्यारी
विज्ञापन
डा. आरएस टोलिया - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
15 नवंबर 1947 को देहरादून में जन्मे डा. आरएस टोलिया के पूर्वज मुनस्यारी के टोला गांव के मूल निवासी थे। उच्च शिक्षा लेने के बाद डा. टोलिया ने 1971 में आईएएस क्वालीफाई किया। यूपी और उत्तराखंड में आईएएस अधिकारी के तौर पर उन्होंने 35 वर्ष की सेवा की थी। वह यूपी के समय में चमोली के एसडीएम रहे। बाद में वह झांसी में आयुक्त बने थे।
विज्ञापन


यूपी के समय में वह पर्वतीय विकास सचिव, डेयरी फेडरेशन के चेयरमैन, यूपी के गन्ना आयुक्त जैसे पदों पर रहे। वह कुमाऊं के कमिश्नर रहे और उत्तराखंड में ग्राम्य विकास सचिव, डिप्टी चीफ सेक्रेटरी, एटीआई नैनीताल के निदेशक जैसे पदों पर रहने के बाद उनको 2003 में उत्तराखंड के मुख्य सचिव का दायित्व मिला। इस पद पर वह 2005 तक रहे। मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद सरकार ने उनको 2005 में उत्तराखंड का मुख्य सूचना आयुक्त बनाया। इस पद पर वह 2010 तक रहे। मुख्य सूचना आयुक्त के तौर पर उन्होंने लोगों को सूचना के अधिकार की जानकारी देने के लिए बड़ा अभियान चलाया। वह इस कानून को सख्ती से लागू करने के पक्षधर थे और आम लोगों की समझ विकसित करने के लिए उन्होंने कई कार्यशालाएं आयोजित कीं।

एक सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पहचान रखने वाले डा. टोलिया को पहाड़ के जनजीवन और संस्कृति की गहरी समझ थी। वह हमेशा पहाड़ की चिंता करते थे। अपने लेखों और किताबों में उन्होंने कई ऐसी बातें लिखीं, जिनसे पहाड़ को आगे बढ़ाया जा सकता है। डा. टोलिया अवकाश प्राप्ति के बाद मुनस्यारी आकर बस गए। आमतौर पर पहाड़ के बड़े अधिकारी बाद पर पहाड़ लौटना नहीं चाहते, लेकिन डा. टोलिया ने इस मिथक को तोड़ने का प्रयास किया था। मुनस्यारी में उनका मकान है। 2012 में यह मकान बन गया था। वह अक्सर यहीं आकर रहते थे। बीमारी के कारण उनको दिल्ली ले जाया गया था, जहां मंगलवार की सुबह उनका निधन हो गया।
विज्ञापन


डा. टोलिया ने लिखी थी कई किताबें
पिथौरागढ़/मुनस्यारी। आईएएस डा. आरएस टोलिया निरंतर रचनाक्रम में संलग्न रहते थे। उन्होंने लोक सूचना अधिकारियों के लिए हस्तपुस्तिका, ए प्रेक्टिकल गाइड टू राइट टू इनफारमेशन, फाउंडर्स आफ माडर्न एडमिनिस्ट्रेशन आफ उत्तराखंड (1815-1884), सम आस्पेक्ट एडमिनिस्ट्रेशन हिस्ट्री आफ उत्तराखंड, इनसाइड उत्तराखंड टूडे, पटवारी, घराट, चाय स्वावलंबन का आधार, फूड फार थॉट एंड एक्शन जैसी किताबें लिखी। वह जोहारी संस्कृति के ज्ञाता थे। हिमालय के बारे में उनको विशद ज्ञान था।

मल्लाजोहार विकास समिति के संस्थापक थे
मुनस्यारी। डा. आरएस टोलिया मल्ला जोहार विकास समिति के संस्थापक थे। इस समिति के माध्यम से कई बार मल्लाजोहार की समस्याओं पर सेमिनार कराए गए। डा. टोलिया उनमें सक्रिय भागीदारी करते थे। डा. टोलिया अपने पीछे पत्नी मंजुला टोलिया और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी प्रीति नाबार्ड चंडीगढ़ में प्रबंधक है और दामाद आईआईटी में इंजीनियर हैं। छोटी बेटी प्रियंका फैशन डिजायनर हैं। उनकी अभी शादी नहीं हुई।

टोलिया के शोक में कई कार्यक्रम रद्द
मुनस्यारी। डा. आरएस टोलिया के निधन की सूचना मिलते ही भाजपा ने मंगलवार को प्रस्तावित प्रदर्शन स्थगित कर दिया। सीमांत शिल्पी विकास समिति ने भी भ्रमण कार्यक्रम रोक दिया। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके आवास में गए। वहां कोई मौजूद नहीं था। उनकी पत्नी उनके साथ ही दिल्ली गई हुई हैं। मल्ला जोहार विकास समिति ने शोकसभा की और डा. टोलिया के कामों को याद किया। शोकसभा में चंद्र सिंह लस्पाल, लोक बहादुर सिंह, राजू बृजवाल, वीरू बुग्याल, बाला सिंह आदि थे। भाजपा नेता रुद्र सिंह पंडा, प्रयाग सिंह पालीवाल ने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने महान शोधकर्ता खो दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें