जसपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर एसके सिंह की ड्यूटी के दौरान गोली मारने की घटना को लेकर यहां के डॉक्टरों में भारी गुस्सा है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के आह्वान पर बृहस्पतिवार को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने काम नहीं किया। डॉक्टरों ने मांग की है कि तत्काल हत्यारों को पकड़ा जाए और ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों को सुरक्षा दी जाए।
घटना की जानकारी मिलते ही बृहस्पतिवार सुबह सभी डॉक्टर जिला अस्पताल में एकत्र हुए और बैठक की। इसके बाद डॉक्टरों ने फैसला लिया कि ताजा परिस्थिति में अस्पताल में काम कर पाना संभव नहीं है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. एनएस गुंज्याल की अध्यक्षता और सचिव डॉ. केसी भट्ट के संचालन में हुई बैठक में डॉक्टरों ने मांग की कि जसपुर में डॉक्टर के हत्यारों को गिरफ्तार किया जाए, मृतक के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, सभी सरकारी अस्पतालों में पुलिस चौकी स्थापित की जाए, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। डीडीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. बीएस मेहरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओपीडी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया गया। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ का दावा है कि आज पूरे जिले में सरकारी अस्पतालों में काम ठप रहा।
ओपीडी नहीं खुली, मरीज परेशान
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में रोजाना 250 मरीज ओपीडी में आते हैं। डीडीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में यह संख्या 80 से 100 के बीच रहती है। धारचूला में 60 मरीज रोजाना आते हैं। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के कारण सभी अस्पतालों में पहुंचे मरीजों को लौटना पड़ा। ग्रामीण अंचलों से आए अधिकांश मरीजों ने प्राइवेट अस्पतालों की शरण ली। जिले के अस्पतालों में पहले से ही डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। उसमें भी कार्य बहिष्कार जैसे फैसलों से मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है।
इमरजेंसी में भी नहीं मिले डॉक्टर
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में भी सुबह डॉक्टरों ने ड्यूटी नहीं दी। कई मरीज आपात कक्ष में पहुंचे थे, लेकिन उनको इलाज नहीं मिल पाया। बाद में एसडीएम अनुराग आर्य ने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीश लाल से बात की और तत्काल इमरजेंसी में डॉक्टर की ड्यूटी लगाने को कहा पर प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने इमरजेंसी के बहिष्कार का पहले ही फैसला ले लिया था, जिस कारण मरीजों को खासी दिक्कत हुई।