पिथौरागढ़ में जेनेरिक दवा की दुकान
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पिथौरागढ़ में जिला अस्पताल के पास दो वर्ष पहले जेनेरिक दवाओं की दुकान खुल गई थी। जिला रेडक्रास समिति दुकान का संचालन करती है, लेकिन अब तक लोगों में जेनेरिक दवाओं के प्रति कोई खास रुझान नहीं बढ़ा है। डॉक्टर भी मरीज के लिए जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। कुछ पढ़े लिखे और जानकारी रखने वाले लोग ही जेनेरिक दवा की दुकान तक पहुंचते हैं। बाजार में मिलने वाली अन्य दवाओं की तुलना में जेनेरिक दवाओं की कीमत कम होती है।
दुकान का संचालन करने वालों का कहना है कि डॉक्टर जेनेरिक दवाओं को मरीज की पर्ची में नहीं लिखते हैं। दो वर्ष पहले जब जेनेरिक दवाओं की दुकान खुली तो उस समय ऐसा लगा कि अब लोगों को सस्ती और अच्छी दवाएं मिलने लगेंगी। उस समय मेडिकल स्टोर चलाने वालों ने दुकान खोलने का विरोध भी किया था, लेकिन अब भी डॉक्टरों की ओर से पर्ची में सिर्फ वही दवाएं लिखी जाती हैं, जो सभी दुकानों में उपलब्ध हो सके।
इस संबंध में जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. केएस मेहता का कहना है कि डॉक्टर मरीज को किसी एक दुकान से दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यह मरीज या उसके तीमारदारों पर निर्भर करेगा कि वह कहां से दवाएं लेते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश दवाइयां मरीजों को अस्पताल से मिल जाती हैं। कुछ खास दवाओं के लिए ही बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जल्द ही जेनेरिक दवाओं की ज्यादा खपत के लिए प्रयास किए जाएंगे, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।