फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खेत के मलबे का एक साल बाद भी निस्तारण नहीं

Wed, 19 Jul 2017 10:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
विज्ञापन
कुमालगौनी में एक साल से नहीं हटा खेतों में पटा मलबा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कुमालगौनी गांव में 30 जून 2016 की रात आई आपदा के दौरान मलबे से दबी दस नाली जमीन पर अब कोई फसल नहीं उगती। जहां पर पहले धान, गेहूं की फसल लहलहाती थी, वहां पर अब घास उग आई है। कुमालगौनी में आपदा की चपेट में आकर तीन लोगों की मौत हुई थी और कई जानवर दबकर मारे गए थे। मकानों के नुकसान के साथ-साथ जमीन भी नष्ट हो गई थी।
विज्ञापन


कुमालगौनी निवासी बहादुर राम ने बताया कि खेतों पर इस कदर मलबा पटा है कि उसे हटा पाना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि आपदा के तुरंत बाद यहां पहुंचे तत्कालीन जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने आश्वासन दिया था कि पीड़ित परिवारों के लिए मकान बनाए जाएंगे और खेतों में पटे मलबे को हटाया जाएगा। वह कहते हैं कि इस आश्वासन पर कोई अमल नहीं हुआ। कुमालगौनी के पीड़ित परिवारों ने नाचनी बाजार में किराए के कमरे ले रखे हैं। सरकार ने सिर्फ चार महीने तक किराए का भुगतान किया, उसके बाद यह राशि बंद हो गई।

उन्होंने कहा कि यदि खेतों पर पटा मलबा हटा दिया जाता तो कम से कम कुछ महीनों के लिए राशन खेतों से निकल आता। आपदा के बाद हुई प्रशासनिक और सरकारी उपेक्षा से वह बेहद खिन्न हैं। बहादुर राम ने कहा कि वह जल्दी ही जिलाधिकारी के सामने इस समस्या को रखेंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें