धारचूला के खेला धूरा में नशे के खिलाफ नारेबाजी करतीं महिलाएं।
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खेला की महिलाओं की शराब और नशे के खिलाफ चलाई गई मुहिम से गांव के लोग भी जुड़ गए हैं। महिलाओं और गांव के लोगों ने फैसला किया है कि किसी भी समारोह में न तो शराब पीने देंगे और ना ही पिलाई जाएगी। नशाबंदी के लिए गांव के लोग बाकायदा स्टांप पेपर पर शपथपत्र महिला संगठन को दे रहे हैं।
खेला की उप प्रधान देवकी देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने शराब से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को बताया। कहा कि शराब और अन्य नशा शरीर को खोखला कर देता है। कहा गया कि खेला ग्राम पंचायत को नशामुक्त बनाने के लिए महिला और युवा शक्ति ने जो पहल की है, वह सराहनीय है। लोगों ने एक मत होकर भगवान छिपला केदार की शपथ लेते हुए कहा कि आज से किसी भी सामाजिक और व्यक्तिगत कार्य में नशे का प्रयोग नहीं करेंगे। कहा गया कि जिन लोगों ने अभी तक शराब बंदी के बांड नहीं भरे हैं, वे लोग 23 मार्च शाम 4 बजे तक बांड भरकर दे दें।
महिलाओं ने कहा कि वे शराब बंदी के मुद्दे से पीछे हटने वाली नहीं हैं। आंदोलन को सफल बनाने के लिए जो संभव होगा, किया जाएगा। पूर्व प्रधान कल्याण सिंह धामी ने अभियान की सराहना की। कहा कि महिलाओं ने इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए जबरदस्त मेहनत की है। पूर्व प्रधान ने कहा कि इतिहास गवाह है जब जब नारी शक्ति ने कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है, तब-तब सफलता मिली है। महिलाओं ने नशे के खिलाफ नारेबाजी भी की। बैठक में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं।