पांगला की प्रधान अपना ग्रामश्री पुरस्कार लौटाने के लिए बृहस्पतिवार को 130 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ पहुंच गई।
उनके साथ-साथ आए चार अन्य प्रधानों ने डीएम से साफ शब्दों में कह दिया कि जब गांवों में कोई विकास हो ही नहीं रहा है तो ग्राम पंचायतों को भंग कर दिया जाए और उनकी मुहर तथा बस्ते को भी जमा कर दिया जाए। अजीब तरह के इस प्रस्ताव को सुनकर डीएम हक्का बक्का रह गए।
उन्होंने प्रधानों को समझाया कि उनके गांव की जो समस्याएं हैं उनका समाधान आज ही से शुरू किया जाएगा। बीएडीपी के मद की राशि सीधे ग्राम प्रधानों को दी जाएगी। उन्होंने प्रधानों को समझाया कि इतना कड़ा कदम न उठाएं। समस्याओं के समाधान की जितनी कोशिश होगी उसे किया जाएगा।
पांगला की प्रधान देवकी देवी ने एक सप्ताह पूर्व यह ऐलान किया था कि उनको इस साल राज्य स्थापना दिवस को जो ग्रामश्री पुरस्कार और उसके साथ विकास कार्यों के लिए दो लाख रुपए की राशि मिली थी उसे वह लौटा देंगी। प्रधान को विकासखंड कार्यालय के उपेक्षापूर्ण को लेकर भारी गुस्सा है। उन्होंने कहा कि गांव की तरफ से जितने भी प्रस्ताव ब्लाक कार्यालय को दिए गए उनमें से एक में भी सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब इस तरह का रवैया रहेगा तो गांवों में विकास के काम कैसे होंगे।
तीन दिन पूर्व देवकी देवी धारचूला में खंड विकास अधिकारी को पुरस्कार लौटाने गई थी लेकिन बीडीओ डीएन जोशी ने पुरस्कार वापस लेने से इंकार कर दिया। बाद में प्रधान ने डीएम को पुरस्कार लौटाने का फैसला लिया। आज कई प्रधानों के साथ यहां पहुंची पांगला की प्रधान ने डीएम से साफ शब्दों में कह दिया कि जब ग्राम पंचायतों में कोई काम नहीं हो पा रहा है तो इन पंचायतों को ही भंग कर दिया जाए।
डीएम ने फिलहाल प्रधानों को समझाबुझाकर वापस लौटा दिया है। डीएम से मिलने वालों में जयकोट के प्रधान चंद्र सिंह, कुटी की प्रधान सरिता देवी, सुवा की प्रधान धाना देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिरखू सिंह, समाजसेवी जनक बिष्ट, भास्कर सिंह, कवींद्र सिंह, लोकेंद्र सिंह आदि थे। प्रधान देवकी देवी ने कहा है कि यदि डीएम की ओर से दिए गए आश्वासन पर तत्काल कोई अमल नहीं हुआ तो गांव के लोग अगला कदम उठाने को बाध्य होंगे।