महाकाली पर बनने वाले पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की गिनती का काम शुरू होने के बाद लोगों का गुस्सा फिर से बढ़ गया है। रविवार को लोगों ने धरना देकर प्रदर्शन किया और प्रशासन की कार्रवाई पर आक्रोश जताया। लोगों ने मंगलवार को डूब क्षेत्र के लोगों की डीएम के साथ होने वाली बैठक में समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है।
रविवार को लोनिवि विश्रामगृह में महाकाली की आवाज संगठन ने स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों की बैठक बुलाई। बाद में प्रदर्शन किया। संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि सरकार और प्रशासन डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों को दूसरी जगह लगाकर भरपाई की बात तो कर रहा है, लेकिन यह क्यों नहीं बताया जा रहा है कि प्रभावित होने वालों को कहां बसाया जाएगा और उनके रोजगार की क्या व्यवस्था होगी। व्यापार संघ अध्यक्ष संजीव जोशी ने कहा कि जनता को गुमराह कर यदि पेड़ों की गिनती का काम जारी रहा तो दस जनवरी को बलपूर्वक पेड़ों की गिनती रोकी जाएगी और सभी लोग सामूहिक गिरफ्तारी देंगे।
ग्रामीण मुरली मनोहर भट्ट ने कहा कि मंगलवार को डीएम के साथ पहले जनता को सारी बात बताई जाए, उसके बाद ही पेड़ों की गिनती की जाए। मंगलवार नौ जनवरी को डीएम के साथ होने वाली बैठक में बाजार में जुलूस निकालकर प्रतिनिधिमंडल को पिथौरागढ़ भेजा जाएगा। धरने पर व्यापार संघ जिला उपाध्यक्ष धर्मानंद नरियाल, पवन भट्ट, शांति प्रसाद भट्ट, बेनीराम कलखुड़िया, प्रकाश डिक्टिया, गिरधर पंगरिया, केशव दत्त जोशी, मनोज गड़कोटी आदि लोग शामिल थे।
पंचेश्वर बांध का विरोध और तेज करेंगे
पिथौरागढ़। उत्तराखंड क्रांति दल ने पंचेश्वर बांध का विरोध और तेज करने का निर्णय लिया है। इसके लिए पार्टी बांध प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों को बांध बनने से होने वाले नुकसानों की जानकारी देगा। पार्टी जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर पुनेड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंचेश्वर बांध पर चर्चा की गई। कहा गया कि एक ओर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की बात की जा रही है, बारहमासी सड़क बनाई जा रही है, दूसरी ओर पंचेश्वर जैसा बांध बनाया जा रहा है। सरकार की इस नीति का पुरजोर विरोध किया जाएगा। दल ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण न होने पर रोष जताया। कहा कि सरकार 1977 में आपातकाल में जेल गए लोगों को सम्मान और पेंशन देने पर विचार कर रही है। जिन लोगों ने राज्य आंदोलन में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया, उन लोगों को आज भी आंदोलनकारी का दर्जा हासिल नहीं है। बैठक में पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी, सुशील पांडेय, दलीप धामी, जोध सिंह बोरा, प्रेम सिंह बोरा, मदन पोखरिया, बीडी कोहली, चंद्रप्रकाश कोहली आदि मौजूद थे।