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रेबीज के टीके लगाने के लिए एक माह में भारत के 17 मरीजों को जाना पड़ा नेपाल

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धारचूला में खड़ी खुशियों की सवारी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला(पिथौरागढ़)। धारचूला का सरकारी संयुक्त अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में नेपाल से भी पिछड़ गया है। स्वास्थ्य महकमा चीन और नेपाल सीमा पर स्थित इस अस्पताल में रैबीज के टीके तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। यही कारण है कि पिछले एक माह में भारत से 17 लोगों को रैबीज के टीके लगाने के लिए नेपाल जाना पड़ा।
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नेपाल के लोग दाल, चावल, चीनी सहित आम जरूरतों के साथ ही चिकित्सा सुविधा के लिए भी भारत के अस्पतालों पर ही निर्भर हैं। बुखार, पेट दर्द से लेकर प्रसव तक के लिए भी नेपाल से मरीज भारत आते हैं। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ जब भारत के मरीजों को रैबीज के टीके के लिए नेपाल के अस्पताल जाना पड़ रहा है। नवंबर से धारचूला के संयुक्त अस्पताल में रैबीज के टीकों का अभाव है। सरकारी अस्पताल में टीके नहीं मिलने से गरीब लोग तीन किमी दूर नेपाल के दार्चुला में स्थित गल्फे अस्पताल जा रहे हैं। कुछ दिन पूर्व जुम्मा गांव निवासी दीपा देवी की बेटी को कुत्ते ने काट लिया था। दीपा जब अपनी बेटी को धारचूला अस्पताल ले गई तो वहां टीका नहीं था। बाजार में टीका महंगा मिलने के कारण वह बेटी को नेपाल ले गई। फरवरी में भारत से 17 मरीजों ने दार्चुला के गल्फे अस्पताल जाकर टीके लगाए।
आंखों की जांच के लिए भी जा रहे नेपाल
धारचूला। भारत से केवल रैबीज के टीके लगाने के लिए ही नहीं बल्कि आंखों की जांच के लिए भी मरीज नेपाल जा रहे हैं। धारचूला संयुक्त अस्पताल में सीमित सुविधाएं हैं यहां के अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। पिथौरागढ़ जिला अस्पताल जाने के लिए धारचूला से जिला मुख्यालय की दूरी 100 किलोमीटर है, जबकि नेपाल के दार्चुला अस्पताल की दूरी मात्र दो किमी है। वहां पर गल्फे अस्पताल के साथ ही अलग सरकारी आंख का अस्पताल भी है। इसके चलते भारत से भी ज्यादातर मरीज नेपाल जाना पसंद करते हैं। संवाद
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गांव में ट्रांसफर करने से दंत चिकित्सक गए छुट्टी में
धारचूला। धारचूला सरकारी अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ.केवल मोदी को स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की मांग पर ग्रामीण अस्पताल में स्थानांतरण कर दिया था। वहां उचित व्यवस्था नहीं होने से दंत चिकित्सक अनिश्चितकाल के लिए मेडिकल लीव में चले गए हैं। दंत चिकित्सक डॉ. मोदी मोदी पिछले एक साल अच्छी सेवा दे रहे थे। अब सीमांत के मरीजों को दांत की समस्या के लिए भी प्राइवेट अस्पताल या फिर नेपाल जाना पड़ रहा है। संवाद
जन औषधि केंद्र में दवाओं की कमी
धारचूला। प्रधानमंत्री जन औषधि संचालक शुभम वर्मा ने बताया कि पिछले एक साल से ऑनलाइन डिमांड के बाद भी दवाइयां नहीं पहुंची है, जिससे सीमांत के लोगों बाजार से दवाइयां खरीदने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अस्पताल की एंबुलेंस को 20 साल होने के बाद भी नहीं बदली गई। अब तक नई एंबुलेंस शासन स्तर से नहीं मिली है। संवाद
खुशियों की सवारी एक साल से खड़ी
धारचूला। धारचूला में खुशियों की सवारी की गाड़ी भी एक साल से परिचालक और डीजल नहीं होने से खड़ी है। पिछले 11 महीने से उपनल से रखे चार कर्मचारियों को मानदेय भी नहीं मिला है। संयुक्त अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.एमके जायसवाल ने बताया कि अस्पताल की समस्याओं के बारे में उच्च अधिकारियों को समय-समय पर अवगत कराया जाता रहता है। संवाद
बीडीसी बैठक में मामला उठने के बाद पता चला
धारचूला। सीमांत की बदहाल चिकित्सा व्यवस्थाओं का खुलासा बीडीसी बैठक में जिला पंचायत सदस्य जीवन ठाकुर के मामला उठाने पर पता चला। जिला पंचायत सदस्य ने कहा है कि भारत से मरीजों को उपचार करने के लिए नेपाल जाना पड़ रहा है यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से जरूरी सुविधाएं और जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। संवाद
एक साल में नेपाल में बढ़ी स्वास्थ्य सुविधाएं
पिथौरागढ़। एक वर्ष पहले तक नेपाल के भारतीय सीमा से लगे दार्चुला सहित अन्य क्षेत्रों में अच्छी चिकित्सा सुविधा नहीं थीं। इसके चलते एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए भी मरीज भारत आते थे। अब वहां पर सुविधाएं बढ़ गई हैं। नेपाल के दार्चुला निवासी देव सिंह महरा ने बताया कि अब नेपाल के अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे की सुविधा भी उपलब्ध है। वहां पर सुविधाएं बढ़ने से अब कम ही मरीज भारत आते हैं। संवाद
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