डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट के लि 2010 में जब थल रामगंगा से लिफ्ट पंपिंग पेयजल योजना की मंजूरी मिली तब लोगों को लगा कि अब पेयजल का संकट समाप्त हो जाएगा लेकिन योजना स्वीकृति के छह साल बाद भी स्थिति जस की तस है। डीडीहाट में अभी से पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। पंपिंग पेयजल योजना का काम आठ माह से धन की कमी के कारण ठप है।
योजना के लिए 23 करोड़ रुपये मंजूर हुए लेकिन शासन से मात्र 10 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। नगर के लिए जिन नौ प्राकृतिक स्रोतों से पानी एकत्र किया जाता है उनमें से तीन सूखने की कगार पर हैं। 15 हजार की आबादी वाले इस नगर के लिए रोजाना 1.75 एमएलडी (लाख लीटर) पानी की जरूरत है लेकिन मात्र 0.5 एमएलडी पानी से काम चलाया जा रहा है।
बुड़काफल, जल संस्थान कालोनी में तो पानी एक दिन छोड़कर मिल रहा है। अन्य स्थानों पर पानी की नाममात्र की सप्लाई होती है। अधिशासी अभियंता बिलाल युनुस का कहना है कि पेयजल की स्थिति काफी गंभीर है। जब तक लिफ्ट पंपिंग योजना नहीं बनती तब तक संकट बना रहेगा।
डीडीहाट। गृहणी रुकमिणी देवी का कहना है कि एक स्वीकृत योजना के निर्माण में इतना ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए। वह कहती हैं कि पंपिंग पेयजल योजना का काम जल्दी पूरा किया जाए। ताकि लोगों का संकट दूर हो सके। वह कहती हैं कि सरकार और जनप्रतिनिधियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
डीडीहाट। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष दमयंती पांगती का कहना है कि पेयजल जैसे मुद्दे पर गंभीरता होनी चाहिए। वह कहती हैं कि इस बार बारिश कम होने से प्राकृतिक स्रोत सूखने लगे हैं। इससे संकट गहराने लगा है। जल संस्थान के पास संसाधनों की कमी है। उसका खामियाजा भी लोगों को ही भोगना पड़ता है।
डीडीहाट। नगर निवासी राजेश्वरी पांगती का कहना है कि पानी के संकट से घर का सिस्टम खराब हो रहा है। सुबह ठीक बच्चों के स्कूल जाते समय पानी खुलता है। बच्चों को तैयार करना और पानी भरना एक साथ होता है। यदि पानी सुबह, शाम आता तो यह समस्या नहीं आती। हर घर का सिस्टम खराब हो रहा है।
डीडीहाट। पुष्पा बृजवाल का कहना है कि पानी की बूंदें 24 घंटे तक बचानी पड़ती हैं। क्योंकि पानी यदि आएगा तो 24 घंटे बाद ही आएगा। संकट लगातार गहरा रहा है। आगे चलकर पेयजल 48 घंटे में भी मिल जाए तो गनीमत है। हर तरफ पानी को लेकर ही चर्चा रहती है। इसका समाधान खोजा जाना चाहिए।