सीमांत तहसील धारचूला की संचार सेवा तीन दिन से ठप पड़ी है। इंटरनेट सेवा भी काम नहीं कर रही है। इस कारण तहसील कार्यालय से लोगों के प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं पर भी खासा असर पड़ा है। धारचूला में सिर्फ बीएसएनएल की सेवा काम करती है। सीमांत क्षेत्र होने के कारण निजी कंपनियों को अपनी सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं मिल पाई है। अब सीमांत के लोग सरकार पर यह दबाव बना रहे हैं कि धारचूला में निजी संचार कंपनियों को अपनी सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाए।
जौलजीबी और धारचूला के बीच अक्सर केबल कटने से धारचूला की संचार सेवा ठप होती है। केबल की मरम्मत होने तक फिर से यही समस्या खड़ी हो जाती है। पिछले दस साल से लोग इसी समस्या का सामना कर रहे हैं। धारचूला में मोबाइल सेवा शुरू करने की मांग को लेकर वर्ष 2006 में बड़ा आंदोलन हुआ था। बीएसएनएल ने आंदोलन को देखते हुए कम क्षमता वाला मोबाइल टावर तो लगा दिया, लेकिन उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाया।
इधर, तीन दिन से लगातार संचार सेवा ठप होने से सीमांत के लोग भारी दिक्कत में आ गए हैं। सबसे ज्यादा कठिनाई व्यापारियों को हो रही है। वह सामान का आर्डर समय पर नहीं कर पा रहे हैं। व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा ने कहा है कि अब सीमांत के लोग निजी कंपनियों की सेवा शुरू करने की एकसूत्रीय मांग को लेकर आंदोलन करेंगे।
गणाईगंगोली की ब्राडबैंड सेवा ठप
गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। छह दिनों से बीएसएनएल की ब्राडबैंड सेवा ठप होने से आक्रोशित लोगों ने बीएसएनएल के खिलाफ प्रदर्शन किया। अपने कामों से पोस्ट ऑफिस पहुंच लोगों को जब पता चला कि बीएसएनएल की ब्राडबैंड सेवा विगत दिनों से बंद पड़ी तो लोगों ने बीएसएनएल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कहा कि राजकीय पॉलीटेक्निक, ट्रेजरी, एसबीआई, जिला सहकारी बैंक, पोस्ट ऑफिस नेट प्रणाली से जुड़े होने के कारण गणाईगंगोली की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। न बैंक में लेन-देन हो रहा और न पोस्ट ऑफिस में कोई काम। इतना समय बीतने के बाद भी बीएसएनएल की ब्राडबैंड सेवा को अब तक ठीक क्यों नहीं किया। ब्राडबैंड सेवा चरमराने से स्कूली छात्रों के आवश्यकीय प्रमाण-पत्र नहीं बन पा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि शीघ्र ही ब्राडबैंड सेवा ठीक नहीं की गई तो बीएसएनएल के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में गिरीश उपाध्याय, हरीश मेहता, पुष्कर सिंह, कृपाल बोरा, किशन राम आदि शामिल थे।