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धारचूला ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर पदमुक्त

Thu, 22 Feb 2018 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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नेत्र सिंह कुंवर - फोटो : अमर उजाला
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धारचूला ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर को आखिरकार अपनी कुर्सी से हाथ धोना ही पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ हाइकोर्ट में दायर याचिका निरस्त होने के बाद पीठासीन अधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम घोषित कर दिया। इसके आधार पर कुंवर पदमुक्त हो गए हैं। अब छह माह के भीतर प्रमुख पद के लिए दोबारा चुनाव होंगे। सीडीओ वंदना सिंह ने बताया कि चुनाव होने तक ज्येष्ठ उपप्रमुख सुंदर सिंह को ब्लॉक प्रमुख का चार्ज दिया जाएगा।

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बृहस्पतिवार को पीठासीन अधिकारी संतोष कुमार पांडेय ने विकास खंड में डेढ़ दर्जन क्षेत्र पंचायत सदस्यों और बीडीओ की मौजूदगी के बीच अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम घोषित किया। 37 सदस्यीय सदन में से अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 25 मत पड़े थे, जबकि 12 सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया। अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम घोषित करने के साथ ही नेत्र सिंह कुंवर पदमुक्त हो गए हैं। अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम ब्लॉक के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया। परिणाम घोषित करते वक्त कुंवर मौजूद नहीं थे। इसके साथ ही कुंवर के घर पर घोषित परिणाम की प्रति भेजकर तामील कराई गई।

हाइकोर्ट के आदेश के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर परिणाम घोषित कर दिया है। इस आधार पर उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम की धारा 63 की उपधारा 12 के तहत ब्लॉक प्रमुख पदमुक्त हो गए हैं। -संतोष कुमार पांडेय, पीठासीन अधिकारी
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हाइकोर्ट के आदेश और सदन के मत का सम्मान करते हैं। राजनीतिक विद्वेष के तहत मुझे पद से हटाने की साजिश रची गई है। इसके पीछे भाजपा सरकार का हाथ है। फैसले को हाइकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती देंगे। -नेत्र सिंह कुंवर, निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख, धारचूला

लोकतंत्र के साथ ही विकास खंड के हितों के लिए संघर्ष करने वाले क्षेत्र पंचायत सदस्यों की जीत हुई है। अदालत का फैसला और अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम लोकतंत्र की उपेक्षा करने वाले जनप्रतिनिधि के लिए सबक है। -महेंद्र बुदियाल, भाजपा नेता, धारचूला

भाजपा समर्थित सदस्यों ने खोला था मोर्चा
दो साल से ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ जारी असंतोष के बाद पिछले साल 26 अक्तूबर को भाजपा समर्थित सदस्यों ने मोर्चा खोल लिया था। तत्कालीन सीडीओ ने 12 अक्तूबर को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि तय की थी। 11 अक्तूबर की रात पीठासीन अधिकारी की तबियत बिगड़ने के बाद मतदान आगे बढ़ गया। 5 नवंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में मतदान हुआ। प्रस्ताव के पक्ष में दो तिहाई मत पड़े। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ हाइकोर्ट चले गए। शुरुआती सुनवाई में अदालत ने अविश्वास प्रस्ताव के परिणाम पर रोक लगा दी थी।  हालांकि अंत में उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पर कोई राहत नहीं मिल पाई। 20 फरवरी को हाइकोर्ट के अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ दायर याचिका निरस्त करने के बाद ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी जानी तय हो गई थी।
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कब क्या हुआ
26 सितंबर 2017 को ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास लाया गया
12 अक्तूबर 2017 को फ्लोर टेस्ट की तय तिथि आगे बढ़ी
5 नवंबर 2017 को अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में मतदान हुआ
20 फरवरी 2018 को हाइकोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ याचिका निरस्त की
22 फरवरी को पीठासीन अधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर परिणाम घोषित किया

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