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धारचूला का कांडा जूनियर हाईस्कूल बंद

Mon, 29 Apr 2019 10:29 PM IST
kamlesh kamlesh ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला(पिथौरागढ़)।
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बंद पड़ा कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय कांडा। - फोटो : पिथौरागढ़
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  सीमांत धारचूला तहसील के कांडा गांव के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्र संख्या शून्य हो गई। इस सत्र में एक भी छात्र-छात्रा के प्रवेश नहीं लेने पर शिक्षा विभाग ने शिक्षिकाओं को अन्यत्र संबद्ध कर स्कूल में ताला लगा दिया है।
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धारचूला तहसील के कांडा गांव में स्थित कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पहले काफी चहल-पहल रहती थी। ग्रामीणों के शहरी क्षेत्रों के लिए पलायन करने के कारण पिछले पांच वर्षों में छात्र संख्या में तेजी से गिरावट आई। हालात यह हुए कि पिछले सत्र में छात्र संख्या घटकर मात्र तीन पर सिमट गई थी। इस साल एक भी छात्र-छात्रा ने इस स्कूल में प्रवेश नहीं लिया।

विद्यालय में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले तीनों विद्यार्थी उत्तीर्ण होकर दूसरे विद्यालय में चले गए। किसी भी नए विद्यार्थी के प्रवेश नहीं लेने पर शिक्षा विभाग ने विद्यालय को बंद कर दिया है। विद्यालय बंद करने के बाद यहां पर जो भी स्टाफ था उसे तहसील क्षेत्र के अन्य विद्यालयों में संबद्ध कर दिया गया है। विद्यालय के दशकों पूर्व स्थापित किए गए विद्यालय के बंद होने से ग्रामीण निराश हैं।
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बलुवाकोट के ग्राम कांडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रयाग राज भट्ट ने बताया कि राजकीय कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय कांडा में छात्र संख्या शून्य होने से स्कूल बंद हो गया है। इसकी मुख्य वजह गांव के लोगों का पलायन करना है। उन्होंने बताया कि गांव के लोग अपने बच्चों को बलुवाकोट मार्केट, धारचूला, पिथौरागढ़ या सितारगंज आदि जगहों पर रह कर पढ़ा रहे हैं। प्रयाग राज ने बताया कि कांडा गांव में वर्तमान में 52 परिवार रहते हैं। गांव से पलायन होने के कारण इस समय केवल बुजुर्ग लोग ही रह गए हैं। गांव का प्राथमिक स्कूल भी बंद होने की कगार पर है। इस समय प्राथमिक स्कूल में भी केवल तीन बच्चे पढ़ रहे हैं।

मार्च में इस विद्यालय में केवल तीन छात्र संख्या थी। तीनों बच्चों ने आठवीं पास करने के बाद अन्य विद्यालय में प्रवेश ले लिया है। उनके स्टाफ ने गांव-गांव जाकर लोगों को अपने बच्चों को विद्यालय में प्रवेश के लिए प्रेरित भी किया, लेकिन अधिकतर लोगों के पलायन करने से एक भी छात्र नहीं मिला।
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- राजेश्वरी सोनाल, प्रभारी प्रधानाचार्य।
 
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