देवलथल क्षेत्र में नियमों के विपरीत किए जा रहे खड़िया खनन से लोगों की जान को आफत में डालने का काम किया जा रहा है। खड़िया खनन के लिए खोदे गए गड्ढों को तत्काल भरने का नियम है लेकिन गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं। खनन के काम में जेसीबी आदि मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, इसकी अनुमति है या नहीं यह खुद प्रशासन को भी पता नहीं है।
विशूनाखान से लेकर देवलथल तक तीन किमी की एरिया में 15 सालों से खड़िया खनन का काम चल रहा है। क्षेत्र में सरकार ने खड़िया खनन के लिए चार पट्टे जारी किए हैं। खड़िया निकालने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं। जिन्हें तत्काल भरने का प्रावधान होता है लेकिन सालों बाद भी गड्ढे नहीं भरे जा रहे हैं। इन गड्ढों में गिरकर एक दर्जन से अधिक मवेशी मारे जा चुके हैं। खड़िया खनन से पुखरौड़ा गांव को खतरा पैदा हो गया है।
पुखरौड़ा निवासी जानकी देवी, माधवी देवी, दीपा आर्या, रंजना देवी, देवकी देवी, सीमा देवी कहती हैं कि खड़िया खनन से गांव को खतरा पैदा हो गया है। खनन के लिए खोदे गए गड्ढों में बच्चों के गिरने का अंदेशा बना हुआ है। खनन के काम में मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। मशीनों के प्रयोग की अनुमति है या नहीं इसका भी उत्तर प्रशासन नहीं दिया जा रहा है। इन लोगों ने खनन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। कहा है कि इस संबंध में उन लोगों ने मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है।
तहसीलदार की बातें विरोधाभाषी
प्रभारी तहसीलदार सदानंद भट्ट कहते हैं कि देवलथल क्षेत्र में खनन मानकों के अनुसार हो रहा है। गड्ढे भरने की कार्रवाई कराई जाएगी। जेसीबी के प्रयोग की अनुमति के सवाल पर मानकों के अनुसार खनन हो रहा कहने वाले प्रभारी तहसीलदार कहते हैं कि अनुमति है या नहीं इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इसका पता लगाया जाएगा।