धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए रं समुदाय के लोगों ने बीआरओ के खिलाफ प्रदर्शन किया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने इस संबंध में एसडीएम दिवेश शासनी को ज्ञापन भी सौंपा।
संस्था के अध्यक्ष दीपक रोंकली के नेतृत्व में लोगों ने प्रदर्शन किया।
इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि एक सितंबर को गुंजी में तैनात बीआरओ के 65 आरसीसी ग्रेफ के कमांडिंग अधिकारी से पूर्व पालिकाध्यक्ष अशोक नबियाल, प्रधान सनम नबियाल, सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल, जीवन रोंकली और राजेंद्र नबियाल सहित कई ग्रामीण मिलने पहुंचे थे। उन्होंने स्थानीय लोगों को कार्य से निकालने और भारी संख्या में बाहरी मजदूरों को नोटिफाइड क्षेत्र में लाए जाने का विरोध किया।
आरोप है कि कमांडिंग अधिकारी ने ग्रामीणों से दुर्व्यवहार किया एवं धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी टिप्पणी करते हुए उनकी भावनाओं को आहत किया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही करने की मांग की। इस दौरान महासचिव दिनेश चलाल, पूर्व अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, खुशाल गर्खाल, अरविंद रोंकली, नारायण दरियाल, व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा, नृप गर्ब्याल, अश्विनी नपलच्याल समेत कई लोग मौजूद रहे। इधर एसडीएम दिवेश शाशनी ने बताया कि बीआरओ के उच्चाधिकारियों से वार्ता हुई है। रविवार को गुंजी में ग्रामीणों के साथ वार्ता कर मामले को सुलझा लिया जाएगा।
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चीन सीमा पर क्रमिक अनशन पर बैठे ग्रामीण
जनजाति समाज के लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और स्थानीय ग्रामीणों को सड़क निर्माण कार्य से हटाने से चीन सीमा से लगे व्यास घाटी के ग्रामीणों में गुस्सा है। शनिवार को गुंजी, नपलचु, रोकांग और कुटी गांव के ग्रामीण गुंजी और नाबी के बीच चेनयम नामक जगह पर क्रमिक अनशन में बैठ गए। ग्रामीणों ने बीआरओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूर्व चेयरमैन अशोक नबियाल ने बताया कि जब तक बीआरओ के ओसी माफी नहीं मांगते हैं क्रमिक अनशन जारी रहेगा। वहां मदन नबियाल, प्रधान सनम नबियाल, प्रकाश नबियाल, अंजू रोंकली सूरज गुंज्याल, प्रधान नरेंद्र नपलच्याल, हरीश कुटियाल, पुनीत कुटियाल आदि ग्रामीण मौजूद रहे। संवाद