धारचूला (पिथौरागढ़)। माध्यमिक अतिथि शिक्षक संगठन ने तदर्थ नियुक्ति की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग शीघ्र पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
ब्लॉक अध्यक्ष जीवन बिष्ट के नेतृत्व में अतिथि शिक्षक बुधवार को जवाहर सिंह नबियाल स्टेडियम में एकत्र हुए। यहां उन्होंने तदर्थ नियुक्ति की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। अध्यक्ष बिष्ट ने कहा कि देहरादून में संगठन आंदोलन कर रहा है जिसके समर्थन में बुधवार को धारचूला में भी प्रदर्शन किया गया।
उन्होंने सीमांत के दुर्गम क्षेत्र में की जा रही सेवाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार से शीघ्र तदर्थ नियुक्ति देने की मांग की। उन्होंने कहा कि धारचूला से भी अतिथि शिक्षक देहरादून पहुंचकर आंदोलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान मनोज भट्ट, खीमानंद पेतोला, आनंद बिष्ट, देवेंद्र बिष्ट, दुर्गादत्त, डॉ. लोकेंद्र भंडारी, जयराज जोशी, होशियार कन्याल, मनोरमा भट्ट, भागीरथी, गीता भट्ट, पार्वती जोशी आदि मौजूद थे।
अतिथि शिक्षकों का कार्य बहिष्कार शुरू, शिक्षण कार्य प्रभावित
लोहाघाट (चंपावत)। तदर्थ नियुक्ति की मांग को लेकर अतिथि शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। चंपावत जिले से बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों के देहरादून में चल रहे आंदोलन में शामिल होने के चलते विद्यालयों में पठन-पाठन कार्य प्रभावित हो रहा है।
अतिथि शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष सुभाष गोस्वामी ने बताया कि अतिथि शिक्षक लंबे समय से तदर्थ नियुक्ति देने की मांग उठाते आ रहे हैं, कैबिनेट में भी यह मुद्दा कई बार आ चुका है लेकिन इसके बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही न होने से अतिथि शिक्षकों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। बताया कि चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लाक में 46, बाराकोट में 29, पाटी में 86, चंपावत में 98 अतिथि शिक्षक दुर्गम, अति दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनका भविष्य सुरक्षित नहीं करती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
बुधवार को संगठन के जिलाध्यक्ष सुभाष गोस्वामी के नेतृत्व में मनीष भट्ट, बसंत बोहरा, किशोर जोशी, प्रमोद परगांई, निर्मल कुमार, विजय कुमार, हरि सिंह, हिमांशु कुमार आर्या, छत्रपाल सिंह, दिनेश जोशी, विजेंद्र मथेला आदि शिक्षा निदेशालय पर चल रहे धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। इधर खंड शिक्षाधिकारी भानु प्रताप कुशवाहा का कहना है कि शिक्षा मित्रों के कार्य बहिष्कार से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई है जिसे सुचारु करने के प्रयास किए जा रहे हैं।