मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। गैला और राप्ती के लोगों के बीच कीड़ाजड़ी दोहन को लेकर फिर से विवाद शुरू हो गया है। दोनों गांव के ग्रामीण कीड़ाजड़ी के इस क्षेत्र को अपनी वन पंचायत का हिस्सा बताते आए हैं। राप्ती के ग्रामीणों का कहना है कि हर बाद कीड़ाजड़ी दोहन को लेकर विवाद होता है। ऐसे में यहां कीड़ाजड़ी दोहन पर रोक लगाते हुए इस मामले का उचित हल निकालना चाहिए। ग्रामीणों ने कीड़ाजड़ी दोहन पर रोक न लगने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
राप्ती के धर्मेंद्र कुमैया के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रेंजर लवराज सिंह पांगती को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि गैला और राप्ती के ग्रामीणों का पंचाचूली की तलहटी में कीड़ाजड़ी दोहन को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। वन विभाग यह तय नहीं कर पा रहा है कि यह वन क्षेत्र किस गांव के अधिकार में है। यह विवाद कभी बड़ी घटना का रूप ले सकता है। ऐसे में वन विभाग को यहां कीड़ाजड़ी दोहन पर रोक लगाते हुए इस मामले का उचित हल निकालना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कीड़ाजड़ी दोहन पर रोक लगाने के निर्देश जारी नहीं हुए तो 29 अप्रैल को होने वाली बीडीसी बैठक का बहिष्कार करते हुए चक्का जाम किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में कई लोग शामिल रहे। संवाद