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Pithoragarh: चीन सीमा तक पहुंची सड़क, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन

Fri, 08 May 2020 07:36 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : ANI
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये चीन सीमा के लिए बनी घट्टाबगढ़-लिपुलेख सड़क का ऑनलाइन उद्घाटन किया। रक्षामंत्री ने कहा कि इस सड़क के बनने से सीमा पर सेना के लिए सामान और रसद की आपूर्ति आसानी से हो जाएगी। इसके साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा भी सुगम हो जाएगी। वहीं, सीमांत गांवों में रहने वाले लोगों को यातायात की सुविधा मिलेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि सड़कों का राष्ट्र के निर्माण में अहम योगदान होता है।

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बीआरओ द्वारा बनाई गई इस महत्वपूर्ण सड़क को देश की जनता को समर्पित करने पर उन्हें अपार खुुशी हो रही है। कैलाश यात्रा पर जाने वाले लोगों के साथ ही स्थानीय लोगों, सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों को इस सड़क के बनने की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि बीआरओ ने विपरीत परिस्थितियों में इस सड़क का निर्माण कार्य पूरा किया है।



उन्होंने इसके लिए बीआरओ की सराहना करते हुए उसे बधाई दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सड़क निर्माण में कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। उन्होंने जान गंवाने वाले जवानों और मजदूरों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।
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हेलीकॉप्टर से पहुंचाई गई मशीनें

चीन सीमा तक सड़क बनाने के लिए बीआरओ ने गुंजी तक भारी मशीनें पहुंचाई थी। इन सभी मशीनों और टनों भार वाले अन्य उपकरणों को हेलीकॉप्टरों से पहुंचाया गया था। कई भारी मशीनों के पार्ट्स अलग-अलग कर हेलीकाप्टरों से गुंजी पहुंचाए गए, जिन्हें ग्रिफ के अभियंताओं ने जोड़ा।

बीआरओ के वाहनों को किया गुंजी रवाना
वीडियो कांफ्रेंसिंग से रक्षामंत्री के संबोधन के बाद नैनीसैनी एयरपोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सेना के धर्मगुरुओं ने मंत्रोच्चार किया। बीआरओ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने पूूजा-अर्चना के बाद नारियल तोड़ा। रक्षा मंत्री के निर्देश पर डीएम डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बीआरओ के वाहनों को हरी झंडी दिखाकर गुंजी के लिए रवाना किया।

सामरिक महत्व की सड़क के उद्घाटन के अवसर पर एसपी प्रीति प्रियदर्शनी, एसडीएम तुषार सैनी, बीआरओ के कर्नल सोमेंद्र बनर्जी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान एयरपोर्ट और एयरपोर्ट के बाहर सीओ आरएस रौतेला के नेतृत्व में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। उधर दिल्ली में वीडियो कांफ्रेंसिंग में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद अजय टम्टा, सीडीएस विपिन रावत, बीआरओ के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह मौजूद रहे।

सड़क निर्माण में अभियंता समेत नौ लोगों को गंवानी पड़ी थी जान

चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख के लिए 1999 से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। तवाघाट से लिपुलेख तक कुल 95 किमी सड़क की कटिंग का काम पूरा हो गया है। तवाघाट से गर्बाधार तक 2008 में ही सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया था। 2014 के बाद सड़क निर्माण में काफी तेजी आई। तवाघाट से गुंजी तक कठिन चट्टानें होने के कारण सड़क निर्माण में काफी कठिनाइयां आईं।

लखनपुर और नजंग की पहाड़ियों को काटना बेहद कठिन था। काटने में पिछले दस सालों में ग्रिफ के एक जूनियर इंजीनियर, दो ऑपरेटरों और छह स्थानीय मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। करोड़ों की मशीनें भी इन्हीं चट्टानों में दफन हो गईं थीं। ग्रिफ के अधिकारियों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान 65 लाख की लागत का डोजर, 2.5 करोड़ रुपये की डीसी 400 ड्रिलिंग मशीन, 40 लाख रुपये की वैगन ड्रिल मशीन सहित कई मशीनें नष्ट हो गई थीं।
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सड़क पर अब तक 408 करोड़ रुपये खर्च

बीआरओ की हीरक परियोजना के तहत चीन सीमा तक बनी घट्टाबगढ़-लिपुलेख सड़क पर करीब 408 करोड़ की राशि खर्च हो चुकी है। सड़क कटिंग का काम 2008 से पहले ग्रिफ की 65 आरसीसी ने किया।

जून 2008 से 67 आरसीसी ग्रिफ सड़क का काम कर रही है। ग्रिफ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने बताया कि सड़क की कटिंग का काम पूरा हो गया है। अगले दो-तीन वर्षों में सड़क को पक्का कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस समय सेना के वाहन इस सड़क पर आवागमन करेंगे। शीघ्र ही जनता को भी छोटे वाहनों के संचालन की अनुमति मिल जाएगी। इससे आम जनता को भी सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा।
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