धारचूला में लखनपुर के पास रस्सी के सहारे चढ़ता ग्रामीण
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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नजंग और लखनपुर के बीच संपर्क नहीं होने से भारत-चीन व्यापारियों के साथ ही पारंपरिक माइग्रेशन करने वाले व्यास घाटी के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लखनपुर से नजंग तक घोड़े-खच्चरों की आवाजाही बंद होने से भारत-चीन व्यापारियों और सीमांत के लोगों को कुलियों के माध्यम से सामान ढोना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि व्यास घाटी के लोग नमक जैसी आम जरूरत की चीज 50 रुपये किलो खरीदने को मजबूर हैं।
तवाघाट-लिपुपास निर्माणाधीन सड़क पर लखनपुर से आगे छरथा और तम्पा में दो जगह सड़क की कटिंग होनी है। सड़क कटिंग का काम चल रहा है। इससे सड़क पर मलबा पटा है। लोग मलबे, बोल्डरों के बीच से आवाजाही कर रहे हैं। तम्पा में मलबे के बीच लोहे और लकड़ी की सीढ़ी से चलना पड़ रहा है। सीमांत की लाइफ लाइन कहे जाने वाला रास्ता बेहद खतरनाक बना है।
मालपा, नजंग, बौलायर धार की चढ़ाई को खच्चर, घोड़ों से पार कराकर आजीविका चला रहे लोग पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त होने से बेरोजगार हो गए हैं। अक्तूबर से व्यास घाटी के गांवों से लोग माइग्रेशन पर निकलने लगेंगे। नजंग से लखनपुर तक मार्ग ठीक नहीं किया गया तो माइग्रेशन करने वाले लोगों के साथ ही भारत-चीन व्यापारियों को खतरे के साथ ही घाटा भी उठना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना हैं कि लोनिवि पैदल रास्तों की देखभाल कर रहा था। जैसे ही पैदल रूट से कैलाश यात्रा स्थगित हुई, इन रास्तों के रखरखाव की ओर से विभाग का ध्यान हट गया। सीमा सड़क संगठन ने इस वर्ष अप्रैल तक नजंग तक सड़क जोड़ने का आश्वासन देकर नवंबर 2017 से पूरे जाड़े के सीजन में आवाजाही बंद रखी थी। बावजूद इसके सीमा सड़क संगठन नजंग तक सड़क नहीं बना पाया। वर्तमान में रोड कटिंग के कारण पुलिस, प्रशासन ने आवाजाही रोक दी है। लोग दोबारा हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
सड़क निर्माण के कारण नहीं बन पा रहा पैदल मार्ग
सड़क कटिंग के चलते नजंग से लखनपुर के बीच लोनिवि पैदल मार्ग नहीं बना पा रहा है। लोनिवि के सहायक अभियंता जीएस मटियाली कहना है कि लखनपुर के पास लगातार कार्य करने पर ही सड़क जल्दी बन पाएगी। रास्ता बनाने के लिए जगह-जगह मजदूर लगाए गए हैं। एक जेई नियमित देखरेख कर रहे हैं।