पिथौरागढ़ में पाले से झुलसी हरी सब्जी दिखाता काश्तकार
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पाले की मार से इस बार हरी सब्जियों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इस मौसम में पहाड़ पर पालक, राई, मेथी, धनिया, मूली का काफी उत्पादन होता है। किसानों ने अक्तूबर में यह सब्जियां बो दी थी। इस समय सब्जियों को बाजार में लाने की तैयारी चल रही थी कि पाले की मार से सब्जियां झुलसने लग गई। कुछ लोगों ने पॉलीहाउस में हरी सब्जी के पौधों को पाले से बचाकर रखा है। उनको ही बाजार में बेचा जा रहा है, लेकिन इनकी कीमत बहुत ज्यादा है।
पिथौरागढ़ नगर के आसपास के गांवों में कई लोग हरी सब्जी का उत्पादन कर बाजार में बेचने लाते हैं। इस सीजन में यहां पर हरी सब्जियों की काफी मांग रहती है। दिसंबर और जनवरी में यहां पर हरी सब्जी का कम से कम पांच लाख रुपये का कारोबार होता है। इस बार यह घटकर दो लाख रुपये में सिमटने जा रहा है। बाजार में जो भी स्थानीय सब्जियां आ रही हैं उनकी कीमत बहुत ज्यादा है। इस बार पालक दस रुपये गड्डी मिल रहा है, जबकि पिछले साल तक पांच रुपये में एक गड्डी मिल जाती थी। हरा धनिया भी सात रुपये गड्डी तक पहुंच गया है। पिछले बार तक यह पांच रुपये में मिल जाता था। राई, मेथी के दाम भी इसी अनुपात में बढ़े हैं।
प्रगतिशील किसान इकबाल अहमद और दयाकृष्ण पुनेड़ा ने कहा कि इस बार सब्जियों का उत्पादन 50 से 70 फीसदी तक गिर गया है। बारिश न होने से किसानों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब सप्ताह में एक दिन बाजार में सब्जी पहुंचा पाना भी संभव नहीं हो रहा है, जबकि पिछले साल तक वह रोज हरी सब्जी लेकर बाजार आते थे।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि इस बार मौसम का रुख बदलने से फसलों के साथ-साथ हरी सब्जियों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर सब्जियों का उत्पादन 50 फीसदी से ज्यादा गिरा है। लोगों की निर्भरता मैदान की मंडियों से आने वाली सब्जियों पर हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर बारिश नहीं होती तो भविष्य में बोई जाने वाली सब्जियों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।