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बालों की कटिंग और सेव बनवाना भी उधारी में

Mon, 12 Dec 2016 11:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़।
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नाई की दुकान - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी का असर बड़े कारपोरेट घरानों, मध्यम और मझोले उद्यमों पड़ने की चर्चाएं तो खूब हो रही हैं लेकिन बेहद छोटे स्तर का काम करने वालों पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है। अब तो यह स्थिति आ गई है कि बारबरों को कटिंग और सेव बनाने का काम उधारी में करना पड़ रहा है। पहले तो नई करेंसी बाजार में नहीं थी। अब सिर्फ दो हजार का नोट आ गया तो लोग दाड़ी, बालों की कटिंग करने के बाद दो हजार का नोट दिखा दे रहे हैं। नियमित रूप से नाई की दुकान में जाने वालों ने भी अब इसमें कमी कर दी है। यह समस्या हर छोटे बड़े शहर में समान रूप से आ रही है। डीडीहाट में हर समय काम से फुर्सत न पाने वाले बारबर इन दिनों खाली हाथ बैठे हैं।
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बारबर इदरीश अहमद, बबलू, वसीम आदि का कहना है कि आठ नवंबर के बाद धंधे पर खासा असर पड़ा है। पहले रोजाना दुकान में 50 लोग आते थे, अब यह संख्या घटकर 10 तक रह गई है। कुछ परिवारों के लोग तो बच्चों की कटिंग कराने के बाद पैसा बाद में देने की बात कहकर निकल रहे हैं। वह कहते हैं कि धंधे में उधार तो चलता ही है लेकिन यह काम ऐसा है कि इसमें उसी समय नकद पैसे की जरूरत होती है। क्योंकि छोटा काम होने के कारण थोड़ी थोड़ी रकम जुटाकर रखनी पड़ती है। इसी से मकान का किराया, दुकान किराया, बच्चों का खर्च, राशन आदि की व्यवस्था करनी पड़ती है। छोटा काम होने के कारण बैंक में निवेश कुछ नहीं होता। जितनी कमाई होती है वह रोज समाप्त हो जाती है। 
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