पिथौरागढ़। पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रहखने वाला रोमांच से भरपूर सोरघाटी के कुमौड़ का प्रमुख हिलजात्रा पर्व आस्था के साथ मनाया गया। हिलजात्रा के मुख्य पात्र भगवान शिव के गण लखिया भूत को देखने के लिए आस्था की भीड़ जुटी।
कुमौड़ की हिलजात्रा पर्व आस्था के साथ ही मुखौटा संस्कृति का वाहक और पहचान है। सोमवार को इस पर्व को लेकर उत्साह के साथ मनाया गया। कुमौड़ के लोगों ने सुबह के समय परंपरा के अनुसार मंदिरों में पूजा-अर्चना की। इसके बाद कोट में हिलजात्रा के पात्रों को मुखौटों और विशेष रंगों से तैयार किया गया। सुबह से ही लोगों का कुमौड़ पहुंचना शुरू हो गया।
दोपहर तक देवखली और मुख्य मार्ग दर्शकों से भर गया। यहां तक कि लोगों ने आसपास के घरों की छत में चढ़कर अपने लिए जगह बनाई। गल्या बल्द, बौड़िया हाैल, बड़ी हाैल, नेपाली हाैल, हलिया, पुतारियां, मछुवारे, दही-ठेकी वाले आदि पात्रों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया और मुखौटा संस्कृति की पहचान कराई। अंत में ढोल-नगाड़ों की ध्वनि के बीच भगवान शिव के प्रमुख गण माने जाने वाले लखिया ने मैदान में प्रवेश किया।
विशाल मुखौटा, गले में बंधी घंटियां, हाथों में चंवर लेकर भगवान शिव का गण लखिया मैदान में पहुंचा तो दर्शक रोमांचित हो उठे। दो गणों ने बमुश्किल कमर पर बंधी रस्सी के सहारे लखिया को काबू में किया। लखिया को मनाने के लिए महिलाओं ने फूल और अक्षत से पूजा की। इसके बाद श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर लखिया शांत होकर लौटा। इस दौरान लोगों ने लखिया और भगवान शिव के जयकारे लगाए इनसे पूरी सोर घाटी गूंज उठी।
इस मौके पर विधायक बिशन सिंह चुफाल, जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद, महापौर कल्पना देवलाल, भाजपा जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी, डीएम आशीष कुमार भटगाईं, एसपी अक्षय प्रह्लाद कोंडे, सीडीओ डॉ. दीपक सैनी, यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ऋषेंद्र महर, गोपू महर सहित कई लोग मौजूद रहे।
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छतों पर भी नहीं मिली जगह
पिथौरागढ़। कुमौड़ की हिलजाता में श्रद्धालुओं की इनती भीड़ रही कि उन्हें घर की छतों में भी जगह नहीं मिली। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोतवाल ललित मोहन जोशी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी परिवर्तन करना पड़ा। टनकपुर-हल्द्वानी से आने वाले वाहनों को ऐंचोली में रोकना पड़ा। धार्मिक आयोजन संपन्न होने के बाद वाहनों को रवाना किया गया। संवाद
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सीएम ने किया हिलजाता का शुभारंभ
पिथौरागढ़। कुमौड़ की हिलजात्रा का सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल रूप से शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुमौड़ की हिलजात्रा आस्था और मनोरंजन का संगम है जो सोरघाटी की ऐतिहासिक पहचान बन गया है। उन्होंने आयोजन के सफल संचालन के लिए समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सातूं-आठूं और हिलजात्रा हमारी लोक संस्कृति, आस्था और लोक परंपराओं के वाहक हैं। यह मुखौटा संस्कृति हमारी मिट्टी और संस्कृति से गहराई से जुड़ी हैं। उन्होंने हिलजात्रा के आयोजन के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। संवाद
500 साल पुरानी है हिलजात्रा
पिथौरागढ़। मान्यताओं के अनुसार, कुमौड़ की हिलजात्रा का इतिहास 500 साल पुराना है। मान्यताओं के अनुसार, नेपाल में हर साल इंद्रजात्रा होती थी। कुमौड़, जाखनी, चैंसर, बिण के चार महर भाई वहां गए थे।राजा ने शर्त रखी कि भैंसे की बलि एक वार में करनी होगी। सबसे छोटे महर भाई ने कर दिखाया। इससे खुश होकर नेपाल नरेश ने यश और समृद्धि के प्रतीक लकड़ी के मुखौटे इनाम में दिए। तभी से सोर घाटी में हिलजात्रा शुरू हुई। वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार, सती के अपमान से नाराज शिव ने अपने गण लखिया को यज्ञ तहस-नहस करने भेजा था। इसे शांत करने के लिए बुजुर्ग अक्षत-फूल डालते हैं।
फोटो-24 पीटीएच 27 पी-कुमौड़ की हिलजात्रा में विशाल मुखौटा, गले में बंधी घंटियां, हाथों में चंवर
फोटो-24 पीटीएच 27 पी-कुमौड़ की हिलजात्रा में विशाल मुखौटा, गले में बंधी घंटियां, हाथों में चंवर
फोटो-24 पीटीएच 27 पी-कुमौड़ की हिलजात्रा में विशाल मुखौटा, गले में बंधी घंटियां, हाथों में चंवर
फोटो-24 पीटीएच 27 पी-कुमौड़ की हिलजात्रा में विशाल मुखौटा, गले में बंधी घंटियां, हाथों में चंवर
फोटो-24 पीटीएच 27 पी-कुमौड़ की हिलजात्रा में विशाल मुखौटा, गले में बंधी घंटियां, हाथों में चंवर
फोटो-24 पीटीएच 27 पी-कुमौड़ की हिलजात्रा में विशाल मुखौटा, गले में बंधी घंटियां, हाथों में चंवर