30 जून 2016 को आई आपदा से हाटथर्प गांव की सिंचाई गूल और सिंचाई की हाइड्रम योजना के क्षतिग्रस्त होने से दस हजार नाली जमीन पर फसल बोने का संकट खड़ा हो गया है। इन खेतों में इस समय लोग धान की नर्सरी लगाते थे, लेकिन पानी के अभाव में अब तक किसान नर्सरी नहीं लगा पाए हैं। हाटथर्प की दस हजार नाली जमीन पर इस बार धान की रोपाई लग पाना संभव नहीं होगा।
हाटथर्प गांव के किसान मनोज साह ने बताया कि 30 जून को आई आपदा से गांव के निचले हिस्से पर बहने वाली चर्मा नदी में सिंचाई के लिए लगाए गए तीन हाइड्रम योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थी। लघु सिंचाई विभाग की देखरेख में संचालित होने वाली इन हाइड्रम योजनाओं को आपदा के दस माह बाद भी सही न किए जाने से ग्रामीणों में विभाग के खिलाफ गुस्सा है। किसानों के खेत नदी से ऊपर होने के कारण सिंचाई की कोई अन्य व्यवस्था नहीं है। इस बार की धान की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इन हाइड्रम योजनाओं से हाटथर्प, राजासेरा, देवीढूंगा की दस हजार नाली से अधिक के खेतों में सिंचाई का काम किया जाता था, परंतु इस बार धान की नर्सरी तैयार होने का समय आ गया है और विभाग द्वारा अब तक सिंचाई की कोई भी व्यवस्था न किए जाने से किसान नाराज हैं। लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनको आपदा मद से कोई धनराशि नहीं मिली। इस कारण मरम्मत के काम नहीं हो पाए। लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत कुमार ने बताया कि यदि शासन से जल्दी धन मिल जाता है तो मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।