शांतिभंग के आरोप में सोमवार को गंगोलीहाट में गिरफ्तार किया गया एक आरोपी रात में हथकड़ी समेत पुलिस के कब्जे से भाग गया। उसे लेकर आ रहे कांस्टेबल को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। कांस्टेबल के साथ होमगार्ड का जवान भी था। उसके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए अधिकारियों को लिख दिया गया है। इस घटना से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। एसपी ने सीओ हिमांशु साह, एसओजी और गंगोलीहाट थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर फरार व्यक्ति की तलाश शुरू करवा दी है।
एसपी रोशन लाल शर्मा ने बताया कि गंगोलीहाट थाने के अंतर्गत हाट भुल्यूड़ा निवासी प्रकाश लाल पुत्र विशन राम के खिलाफ उसकी पत्नी एवं बहन ने मारपीट करने और घर पर हमेशा लड़ाई-झगड़ा करने के आरोप में गंगोलीहाट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गंगोलीहाट थाना पुलिस ने प्रकाश के खिलाफ धारा 151/107/116 में मुकदमा दर्ज किया और सोमवार अपरान्ह उसे घर से गिरफ्तार किया। गंगोलीहाट में बंदीगृह नहीं है और वहां पर उपजिला मजिस्ट्रेट का पद भी रिक्त चल रहा है। धारा 151 के मामले में आरोपी को उपजिला मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश करना पड़ता है।
इसी कारण शाम करीब छह बजे गंगोलीहाट से आरोपी को लेकर गंगोलीहाट थाने का कांस्टेबल राम चंद्र राणा और होमगार्ड डिगर राम पिथौरागढ़ आ रहे थे। गुरना मंदिर के पास रात 9.30 बजे आरोपी प्रकाश ने प्यास लगने का बहाना बनाया और गाड़ी रोकने को कहा। जैसे ही उसे पानी पिलाने के लिए गाड़ी से बाहर उतारा गया तो वह झटके से हथकड़ी छुड़ाकर फरार हो गया और घुप अंधेरे में कहीं छिप गया। उसे लेकर आ रहे कांस्टेबल राम चंद्र राणा और होमगार्ड डिगर राम ने काफी खोजबीन की, लेकिन उसका पता न चलने पर एसपी को सूचना दी। कांस्टेबल और होमगार्ड खाली हाथ जिला मुख्यालय पहुंच गए।
एसपी ने बताया कि पुलिस कांस्टेबल ने इस मामले में लापरवाही की है और उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है। एसपी ने बताया कि इस मामले की जांच सीओ को सौंपी गई है, यदि कांस्टेबल के स्तर से आरोपी को भगाने में इरादतन कोई कदम उठाया गया होगा तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। पुलिस टीम फरार आरोपी को ढूंढने में लगी है, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल पाया है।
मनरेगा घोटाले के मुख्य आरोपी ने किया सरेंडर
विकासखंड विण के ग्राम पंचायत स्याला में मनरेगा में हुए घोटाले के मुख्य आरोपी सुरेंद्र सिंह ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। घोटाले में पांच लोगों को अब तक जेल हो चुकी है। इनमें मिनी बैंक का सचिव, जेई और ग्राम विकास अधिकारी भी शामिल हैं। बताया गया कि सुरेंद्र सिंह पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य का पति है। जांच के दौरान घोटाले में उसकी भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी गई थी। राजस्व पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 406, 409, 420, 465, 467, 468, 471, 506 और 120 (बी) में मुकदमा दर्ज किया था। राजस्व पुलिस की टीम ने उसे पकड़ने के लिए कई बार दबिश दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया। 18 जून से वह घर से फरार चल रहा था। राजस्व उपनिरीक्षक प्रकाश कापड़ी ने बताया कि सुरेंद्र सिंह को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। स्याला गांव में 2008 से 2013 के बीच मनरेगा में करीब 60 लाख रुपये का घोटाला हुआ था। जिलाधिकारी ने घोटाले की जांच के लिए टीम गठित की थी और एसडीएम अनुराग आर्य को टीम का अध्यक्ष बनाया था। मनरेगा घोटाले में लिप्त पांच लोगों की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है।