किशोरी को बहला-फुसलाकर पांच महीने तक अपने घर में बंधक बनाकर रखने वाले एक आरोपी को जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने पर छह माह का साधारण कारावास और भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मुनस्यारी तहसील के थाना क्वीटी अंतर्गत सेमली गांव निवासी पूरन चंद्र द्विवेदी ने गांव की ही एक किशोरी को 21 मई 2014 को बहला-फुसलाकर अपने घर बुलाया। उसके बाद उसने इस किशोरी को बंधक बनाया। 5 अक्तूबर 2014 को किशोरी के भाई को जब यह पता चला कि उसकी बहन पूरन चंद्र द्विवेदी ने बंधक बनाई है तो उसने कुछ लोगों के सहयोग से आरोपी और बहन को पकड़कर थाने पहुंचाया। थाने में पूरन चंद्र द्विवेदी के खिलाफ धारा 363, 366 ए, 376, 342 और पास्को एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ।
पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने इस मामले में किशोरी के माता-पिता, भाई समेत नौ गवाह पेश किए। बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी ने पूरन चंद्र को धारा 363 में दोषी पाते हुए सजा सुनाई, लेकिन अन्य धाराओं में आरोप साबित न हो पाने के कारण उसे दोषमुक्त कर दिया।