विण विकासखंड के स्याला गांव में मनरेगा योजना में धांधली के आरोप में मिनी बैंक के सचिव उमेद सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दी गई है।
इस मामले में पूर्व प्रधान देवराज के खिलाफ पहले ही रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है, जबकि 2009 से 2012 तक उस क्षेत्र में कार्यरत दो ग्राम विकास अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है।
जांच अधिकारी एसडीएम अनुराग आर्य ने बताया कि स्याला गांव में परिवारों की संख्या 120 है, लेकिन गांव में फर्जी तौर पर 164 जॉब कार्ड बनाए गए हैं। अब हर जॉब कार्ड की जांच की जा रही है।
मिनी बैंक सचिव को इस कारण दोषी पाया गया कि उसने कुछ जॉब कार्डों के नाम पर नगद भुगतान कर दिया, जबकि मनरेगा में नगद भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है।
एसडीएम ने बताया कि इस गड़बड़ी में जितने लोग भी शामिल हैं, उन सभी के खिलाफ धारा 419, 420 और 468 में मुकदमे दर्ज हो रहे हैं।
बताया गया कि स्याला ग्राम पंचायत को पांच साल के भीतर 66 लाख रुपये की राशि जारी हुई थी। वर्ष 2013-14 में एकमुश्त 42 लाख रुपये मनरेगा में जारी कर दिए गए।
यहीं से संदेह पैदा होने लगा, क्योंकि अन्य ग्राम पंचायतों को नाममात्र की राशि जारी हो रही थी, जबकि पूरे विकासखंड की राशि को एक ही ग्राम पंचायत को जारी कर दिया गया था।
मनरेगा में धांधली का मामला प्रकाश में आने के बाद जिलाधिकारी ने जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम का गठन किया।
टीम में एसडीएम, आरईएस के अधिशासी अभियंता और जिला पंचायत के वित्त अधिकारी शामिल हैं। एसडीएम ने बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
कुछ और लोग इस गड़बड़ी में शामिल हो सकते हैं। इधर, जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी ने बताया कि ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी की मिलीभगत से ऐसे लोगों के नाम पर भी जॉबकार्ड बना दिए गए जो गांव में नहीं रहते।