मदकोट/पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित बुग्यालों में ठेकेदारों द्वारा नेपाली मजदूरों से प्रतिबंधित जड़ी-बूटियों का दोहन कराया जा रहा है। कीड़ाजड़ी की आड़ में बुग्यालों से अन्य प्रतिबंधित जड़ी-बूटियों का अनियंत्रित दोहन करने से जैव विविधता खतरे में पड़ गई है। प्रकृति प्रेमियों ने प्रमुख वन संरक्षक को पत्र भेजकर बुग्यालों में हो रहे जड़ी-बूटियों के दोहन को रोकने की मांग की है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों में कई बेशकीमती जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा इन बुग्यालों में नेपाली मजदूरों से अवैध तरीके से जड़ी-बूटियों का दोहन कराया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पंचाचूली, अठासी, जिंबा, कुलका, छिपलाकोट, चेर्थी के बुग्यालों में नेपाली जड़ी-बूटियों को निकालने के लिए बुग्यालों को रौंद रहे हैं। कुटकी, मासी, हाथ जड़ी, वन लहसुन, झूला का धड़ल्ले से दोहन किया जा रहा है। जड़ी-बूटी को सुखाने के लिए बुग्यालों में ही पेड़-पौधों को काटकर भट्टी में जलाया जा रहा है।
गोल्फा गांव निवासी प्रकृति प्रेमी मोहन सिंह का कहना है कि ग्रामीणों को कीड़ा जड़ी के दोहन की अनुमति मिली है, लेकिन प्रभावशाली लोग ठेकेदार बनकर नेपालियों से कीड़ा जड़ी के साथ ही अन्य आयुर्वेदिक औषधियों का दोहन भी करा रहे हैं। आरोप है कि दिसंबर से जनवरी को छोड़कर पूरे दस माह तक ठेकेदार के मजदूर इन्हीं बुग्यालों में रहते हैं। लगातार हो रहे दोहन से अब जड़ी-बूटियों के उत्पादन में काफी कमी आ गई है। मोहन सिंह ने प्रमुख वन संरक्षक से बुग्यालों और जड़ी-बूटियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।