जिला एवं सत्र न्यायालय का फैसला
- फोटो : अमर उजाला
जिला एवं सत्र न्यायालय ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 450 में पांच वर्ष की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
30 जुलाई 2017 की दोपहर थल तहसील के एक गांव में सुरेश चंद्र पाठक (50) ने 15 वर्षीय पीड़िता के घर में घुसकर उससे दुष्कर्म किया। परिजनों ने पीड़िता का बागेश्वर के महिला अस्पताल में मेडिकल कराया। दुष्कर्म की पुष्टि होने पर राजस्व पुलिस ने अभिुयक्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए।
शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी ने अभियुक्त को आईपीसी की धारा 376/पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी पाते हुए 10 वर्ष की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आईपीसी की धारा 450 (घर में घुसकर दुष्कर्म) में पांच वर्ष की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी गिरफ्तारी के दिन से न्यायिक अभिरक्षा में है।