पिथौरागढ़। खतरनाक कोविड काल में सीमांत जिले के कोविड अस्पताल बदहाल हैं। बेहतर सुविधा न होने के कारण इनमें कोविड मरीजों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इससे अस्पतालों में उपचार को आए रोगियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती एक कोविड रोगी की मौत हो गई। उनकी मौत का कारण ऑक्सीजन लेबल में कमी आना बताया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि जिला अस्पताल में पर्याप्त संसाधन होने के बाद भी उनका ऑक्सीजन लेवल डॉक्टर कंट्रोल क्यों नहीं कर पाए। जिला अस्पताल के कोविड वार्ड और कोविड अस्पताल और प्राइवेट होटलों से स्वस्थ होकर घरों को लौट चुके कोविड के रोगियों का कहना है कि वहां पर रोगियों का कोई ध्यान रखने वाला नहीं है। कमरों को गर्म रखने की व्यवस्था नहीं है। रोगियों को दिक्कत होने पर चिकित्सक और अन्य कर्मी समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके चलते रोगियों की जान को खतरा हो रहा है। कोविड काल में सीमांत जिले में चिकित्सकों और फार्मासिस्ट, एएनएम, नर्स, स्टाफ नर्स के कई पद रिक्त चल रहे हैं। इसके बाद भी इन पदों को भरने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। प्रभारी पीएमएस केसी भट्ट का कहना है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। अस्पताल में मौजूद सारी सुविधाओं का लाभ रोगियों को दिया जा रहा है।
पिथौरागढ़ जिले में चिकित्सकों के 52 पद रिक्त
पिथौरागढ़। जिले में चिकित्सकों के 187 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 135 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। लैब तकनीशियन के 20 पद स्वीकृत हैं, इनमें से सिर्फ तीन लैब तकनीशियन कार्यरत हैं और 17 पद खाली हैं। जिले में 145 फार्मासिस्ट के पद स्वीकृत हैं। इनमें से 109 कार्यरत हैं और 36 फार्मासिस्टों के पद खाली हैं। सुविधाओं और पदों की कमी के कारण आए दिन रोगियों को जिले के अस्पतालों से हायर सेंटर रेफर होना पड़ रहा है।
जिले में अस्पतालों में रिक्त पदों की सूचना की सूचना लगातार निदेशालय को भेजी जा रही है। सभी अस्पतालों को अस्पताल में मौजूद हर सुविधा का लाभ रोगी को देने के लिए निर्देशित किया गया है।
- डॉ. एचसी पंत, सीएमओ पिथौरागढ़।