नेपाल सीमा पर बसे अंतिम बाजार झूलाघाट को जोड़ने वाली सड़क पर पांच पुलों का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है। इन पुलों के लिए वर्ष 2016 के अंत में राज्य वित्त से 2.5 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई। पुलों का निर्माण अगस्त 2018 तक पूरा करना है, लेकिन मजेदार बात यह है कि एक पुल का तो अभी निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हुआ है। वहीं, अधिकारियों का दावा है कि तय समय पर सभी पुलों का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
झूलाघाट-पिथौरागढ़ मार्ग पर ठूलीगाड़, वड्डा के पास मसानीगाड़, मूनाकोट और हुड़कना के पास दो पुल बनने थे। जनवरी 2017 में लोनिवि के पिथौरागढ़ प्रांतीय खंड की देखरेख में पुलों के निर्माण का कार्य शुरू हुआ। इन पुलों को अगस्त 2018 तक बनाने का लक्ष्य था। केवल पांच माह का समय बचा है। वर्तमान तक ठूलीगाड़ के पुल पर लिंटर नहीं पड़ा हैं। हुड़कना के पास बनने वाले दो पुलों में से एक का काम शुरू नहीं हुआ हैं। दूसरे पुल पर लिंटर तो पड़ गया है, लेकिन पुल के दोनों ओर रेलिंग लगाने समेत कई काम अभी अधूरे हैं। वड्डा बाजार के बाद मसानीगाड़ के पुल पर सिर्फ नींव ही खुद पाई है। इसी तरह मूनाकोट के पुल पर लिंटर पड़ गया है, लेकिन काफी काम शेष हैं।
वहीं, लोनिवि के सहायक अभियंता एचएस बथियाल कहते हैं कि पुलों का निर्माण समय पर करा लिया जाएगा। ठुलीगाड़ के पुल का लिंटर इस महीने पड़ जाएगा। वड्डा के पास मसानीगाड़ के पुल का काम शुरू कराया जा रहा है। बरसात से पहले पुल बन जाएंगे।
पुलों में इतना हुआ है काम
-ठूलीगाड़ पुल -65 लाख में से 58 लाख रुपये खर्च
-हुड़कना पुल -90 लाख रुपये में से 81 लाख खर्च
-मसानीगाड़ पुल का काम शुरू नहीं- बजट 65 लाख
-मूनाकोट और हुड़कना के दूसरे पुल की लागत 15-15 लाख
दो-लेन के पुल बनने से होगी सहूलियत
झूलाघाट-पिथौरागढ़ मार्ग पर निर्माणाधीन पुलों के बनने से यातायात में दबाव कम होगा। पुल बनने से सड़क दो-लेन की हो जाएगी। इससे वड्डा, अड़किनी, जाखपंत, मूनाकोट, बड़ालू, गौरीहाट, मजिरकांडा, झूलाघाट और नेपाल के लोगों को समय की बचत होगी।