पिथौरागढ़। पहली बार हुए नगर निगम के चुनाव में भाजपा ने कांटे की टक्कर में मैदान मारा और कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है। कांग्रेस के दो हिस्सों में बंटने से इसका सीधा फायदा भाजपा को हुआ और इसने किला फतह करने में कामयाबी हासिल की है। भाजपा सिर्फ 17 वोट से जीती। आकड़ों से साफ है कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी और बागी प्रत्याशी एकजुट होते तो वोटों का बंटवारा नहीं होता। ऐसा इसलिए कि कांग्रेस प्रत्याशी को 3379 और इसी पार्टी की बागी को 9449 मत मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी को 9466 मत पाकर नगर निगम की पहली मेयर बनने का गौरव मिला।
पहली बार अस्तित्व में आए नगर निगम के चुनाव पर हर किसी की नजर थी। जब परिणाम आया तो इसने कांग्रेस को बेचैन करने का काम किया है। दरअसल कांग्रेस के दिग्गज विधायक मयूख महर यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ऋषेंद्र महर की पत्नी मोनिका महर के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। पार्टी ने अंजू लुंठी को मैदान में उतारा तो नाराज विधायक मोनिका महर का निर्दलीय नामांकन कर उनके पक्ष में खड़े हो गए। ऐसे में कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई और भाजपा को एकतरफा मैदान मारने का मौका दे दिया। ऐसा इसलिए कि टिकट बंटवारे के बाद कुछ नेताओं के बगावती सुर बाहर निकले लेकिन पार्टी ने डैमेज कंट्रोल कर लिया। दो फाड़ होने से कांग्रेस को इसका नुकसान झेलना पड़ा जबकि भाजपा ने इस मौके को भुना लिया। मतगणना के आकड़ों की बात करें तो कांग्रेस प्रत्याशी अंजू लुंठी को 3379 और इसी पार्टी से बगावत कर मैदान में उतरीं मोनिका महर को 9449 वोट मिले। दोनों कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होते तो दोनों के मत मिलाकर पार्टी 12828 का आंकड़ा छू लेती और 9466 मत पाने वाली भाजपा की कल्पना देवलाल बहुत पीछे छूट जाती। कांग्रेस के टूटने से इसका सीधा फायदा भाजपा को हुआ। पार्टी प्रत्याशी कम ही वोटों से सही लेकिन मैदान मार ले गई और कांग्रेस को नगर की सत्ता से दूर कर दिया।
टिकट बंटवारे में विधायक की बात मानी जाती तो शायद कांग्रेस को मिलती नगर की सत्ता
पिथौरागढ़। कांग्रेस ने विधायक मयूख महर की मांग को दरकिनार कर मोनिका महर को टिकट नहीं दिया। नाराज विधायक महर पार्टी से बगावत कर अपनी अधिकृत प्रत्याशी मोनिका के पक्ष में खड़े हो गए। ऐसे में कांग्रेस में दो फाड़ हो गए और चुनाव में हार का सामना कर इसका नुकसान झेलना पड़ा। न कांग्रेस जीती और न बागी निर्दलीय। नगर की सत्ता भाजपा को मिल गई।
कांग्रेस के बागियों के पार्टी में शामिल होने का मिला भाजपा को फायदा
पिथौरागढ़। टिकट बंटवारे के बाद भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस में कलह अधिक सामने आई। यहां तक कि पत्नी को टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी के साथ ही दो बार के पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती ने भाजपा का दामन थाम लिया। दोनों ही दिग्गज भाजपा प्रत्याशी को जिताने में खड़े हो गए इसका फायदा पार्टी को मिला है। भाजपा प्रत्याशी के जीतने से इनकी भी चर्चा है।