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Pithoragarh News: नेपाल में चमेलिया का प्रवाह रुकने से महाकाली किनारे बसे भारतीय गांवों में चिंता

Sat, 05 Sep 2026 11:01 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पड़ोसी देश नेपाल के दार्चुला जिले में अपिहिमाल गांवपालिका के भट्टार में पहाड़ी दरकने से चमेलिया नदी का प्रवाह रुकने के बाद भारतीय क्षेत्र में महाकाली किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। नदी में जलभराव से कृत्रिम झील बनने की सूचना के बाद गेठीगाड़ा, सिमपानी, तालेश्वर, झूलाघाट, कानड़ी, सप्तड़ी, सीमू, बलतड़ी, तड़ीगांव और हल्दू के ग्रामीण संभावित खतरे को लेकर डरे हुए हैं।
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चमेलिया नदी महाकाली में मिलती है। ऐसे में यदि जलभराव बढ़ने के बाद कृत्रिम झील टूटती है तो इसका असर महाकाली किनारे बसे भारतीय गांवों पर भी पड़ सकता है। रसुवा में हाल में हुई आपदा की घटना को याद करते हुए ग्रामीणों ने नेपाल और भारत के प्रशासन से स्थिति पर गंभीरता से निगरानी रखने और समय रहते सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।
काली नदी किनारे बसे लोगों का कहना है कि चमेलिया का प्रवाह रुकने और कृत्रिम झील बनने की जानकारी मिलने के बाद से उनमें भय बना हुआ है। शुक्रवार रात कई लोग ठीक से सो भी नहीं सके। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी संभावित आपदा को रोकने के लिए चमेलिया में हो रहे जलभराव पर लगातार निगरानी और आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
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नदी में जमा मलबा धीरे-धीरे बहना शुरू
दार्चुला की अपिहिमाल गांवपालिका के वार्ड अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा ने भारतीय मीडिया को बताया कि शुक्रवार को भट्टार में पहाड़ी दरकने से चमेलिया नदी का प्रवाह बाधित हो गया था जिससे जलभराव की स्थिति बन गई थी। अब नदी में जमा मलबा धीरे-धीरे बहने के कारण कृत्रिम झील का दायरा कम हो रहा है। हालांकि, अब तक नेपाली प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी बल (एपीएफ) और सेना की कोई टीम भट्टार नहीं पहुंची है।

काली नदी ने किया चेतावनी स्तर पार
झूलाघाट। जिले में हो रही भारी बारिश के बाद महाकाली नदी भी तेज प्रवाह में बहने लगी है। इसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हालात यह है कि इसने चेतावनी स्तर पार कर लिया है। काली नदी का चेतावनी स्तर 889 मीटर है और यह 889.50 मीटर पर बह रही है।


बोले लोग
दार्चुला के भट्टार में चमेलिया नदी में कृत्रिम झील बनने से बलतड़ी के लोगों में डर है। ऐसा इसलिए कि चमेलिया काली नदी में मिलती है। काली नदी गांव से सिर्फ 20 मीटर दूर है। यदि झील बढ़ी और टूटी तो हमारे गांव में भी विनाशकारी त्रासदी होगी।
सुनील चंद, बलतड़ी
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चमेलिया नदी में बनी झील टूटी तो गेठीगाड़ा में सबसे पहले नुकसान होगा। इस झील को बढ़ने से रोकने और अन्य सुरक्षा इंतजाम के लिए नेपाल के साथ भारतीय प्रशासन को गंभीर होना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इसकी कीमत हमें चुकानी होगी।
बिरेंद्र बिष्ट, गेठीगाड़ा
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चमेलिया नदी में जलभराव के अगर बाढ़ आयेगी तो सिमपानी गांव में काली नदी विनाशकारी रूप लेगी। जब से यह जानकारी मिली है हमारी नींद गायब हो गई है। दोनों देशों को मिलकर संभावित त्रासदी को रोकने के उपाय करने होंगे।
किशोर कुमार, सिमपानी

चमेलिया नदी में जलभराव के कारण काली नदी के किनारे बसे लोगों में डर है। चमेलिया में बन रही कृत्रिम झील को सामान्य स्थिति में लाना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो रसुवा जैसी घटना दोबारा हो सकती है इसकी कीमत काली नदी किनारे बसे लोग चुकाएंगे।
रवि धनिक, बीडीसी सदस्य, बलतड़ी

कोट-चमेलिया नदी में हुए जलभराव पर निगरानी रखी जा रही है। हम नेपाल प्रशासन के संपर्क में भी हैं। फिलहाल चमेलिया में हुए जलभराव की स्थिति सामान्य हो रही है। फिर भी हमने एसएसबी, पुलिस सहित अन्य विभागों को अलर्ट मोड पर रखा है।
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भूपेंद्र महर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, पिथौरागढ़
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