पिथौरागढ़ बाजार में एक दुकान में सजे गरम कपड़े पर ग्राहक नहीं
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पहाड़ पर दिवाली के बाद ठंड का असर शुरू हो जाता है और नवंबर से गर्म कपड़ों की बिक्री तेज होने लगती है। इस बार नोटबंदी का ऐसा असर हुआ है कि रेडीमेड की दुकानों में रखे स्वेटर, जैकेट, मफलर, ऊनी टोपी, शाल जैसी सामग्री खरीदने वाले नदारद हैं। जिन व्यापारियों ने दिवाली से पहले स्वेटर, जैकेट समेत अन्य गर्म कपड़े मंगाकर रखे थे वह अब तक ग्राहक नहीं आने से परेशान हैं।
व्यापारियों का कहना है कि गर्म कपड़ों की खरीदारी नवंबर में ही ज्यादा होती है, लेकिन ठीक आठ नवंबर से नोटबंदी होने के कारण बाजार पर भारी गिरावट आई है। कुछ व्यापारी नवंबर में सामान खपाने के बाद दिसंबर में फिर से दिल्ली, बरेली, हल्द्वानी से नए कपड़े मंगा लेते थे, लेकिन इस बार इस पर विराम लग गया है। छोटे नगरों के अलावा बड़े नगरों में नोटों को लेकर ज्यादा हाहाकार है। रेडीमेड कपड़ों का कारोबार करने वाले व्यापारियों ने बताया कि आठ नवंबर के बाद बिक्री में भारी गिरावट आई है।
ग्रामीण अंचलों में स्थिति और ज्यादा खराब है। वहां के बैंकों से रुपया नहीं मिल पा रहा है। लोगों के सामने रोज की सब्जी, दाल की व्यवस्था कर पाना कठिन हो गया है। यही नहीं बच्चों की स्कूल ड्रेस के साथ पहने जाने वाले गर्म कपड़ों की बिक्री भी इस बार ठप हो गई है। व्यापारी दिनभर ग्राहक के आने के इंतजार में बैठे रहते हैं।
बाजार को सुधरने में लंबा समय लगेगा
व्यवसायी शंकर पांडे का कहना है कि बाजार में आई गिरावट को सुधरने में लंबा समय लगेगा। जब तक लोगों की जेब में पर्याप्त पैसा नहीं आ जाता, बाजार नहीं संभल सकता। भुगतान और एटीएम से सीमित मात्रा में धनराशि निकालने की बाध्यता ने स्थिति को ज्यादा खराब किया है। सरकार को नोटबंदी के बाद इतने कड़े प्रतिबंध नहीं लगाने चाहिए थे।