झूलाघाट (पिथौरागढ़)। जहां एक ओर चीन और नेपाल सीमा से सटे भारतीय गांवों में अभी तक संचार सेवा शुरू नहीं हो सकी है वहीं दूसरी ओर नेपाल में संचार सेवाओं को अपग्रेड करने का काम शुरू कर दिया गया है। चीन की हुवावे कंपनी नेपाल टेलीकॉम कंपनी नमस्ते की 2-जी और 3-जी सेवा को 4-जी में अपग्रेड कर रही है।
पिथौरागढ़ जनपद की लगभग 185 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगी हुई है। पंचेश्वर से लेकर कालापानी तक दोनों देशों का सीमांकन करने वाली काली नदी के किनारे बसे अधिकांश भारतीय गांव अभी तक संचार सेवाओं से नहीं जुड़ सके हैं। वहीं नेपाल ने भारतीय सीमा से सटे अपने बैतड़ी और दार्चुला जिलों के सभी गांवों में पांच वर्ष पूर्व ही टावर लगाकर मोबाइल सेवा शुरू कर दी थी। अब नेपाल चीन की मदद से भारत-नेपाल सीमा के साथ पूरे देश में अपने 2जी और 3जी नेटवर्क को से 4-जी में बदल रहा है।
चीन की कंपनी हुवावे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नेपाल की नमस्ते कंपनी के मोबाइल टावर में अपने 4-जी उपकरण लगा रही है। मोबाइल टावर के इस सिस्टम का रखरखाव और सुधार का कार्य भी चीन ही करेगा। नेपाल की टेलीकॉम कंपनी नमस्ते के कर्मचारी धन सिंह मारकंडे ने बताया कि पूरे देश के साथ बैतड़ी के 43 मोबाइल टावर पर 4जी अपग्रेडेशन का काम तेजी से हो रहा है। ग्लोबल टेंडर के माध्यम से चीन की हुवावे कंपनी को यह काम सौंपा गया है।
इनसेट
ब्लैक में मिलते हैं नेपाली सिम
झूलाघाट। भारतीय क्षेत्र में नेपाल की कंपनी के सिम ब्लैक में मिलते हैं। एक सिम की कीमत 200 रुपये नेपाली (125 रुपये भारतीय) रहती है। सिम के लिए सबसे कम 50 रुपये का रीचार्ज (31.25 रुपये भारतीय) मिलता है। इसमें 49 रुपये नेपाल में बात करने के लिए मिलता है। भारत में फोन करने पर तीन रुपये प्रति मिनट के हिसाब से रुपये कटते है। भारतीय क्षेत्र में नेपाल के नेटवर्क का इस्तेमाल होने से हर माह लाखों रुपये नेपाल में चले जाते हैं। ऐसे में भारत सरकार को राजस्व की हानि होती है।
भारत की 10,000 की आबादी नेपाल की संचार के भरोसे
झूलाघाट। नेपाल सीमा से लगे गांवों में भारत ने कुछ स्थानों पर बीएसएनएल के टावर स्थापित किए हैं। सुरक्षा कारणों से इनकी रेंज सीमित की गई है। इसके चलते काली नदी किनारे दुर्गम स्थलों पर स्थित गांवों तक सिग्नल ही नहीं पहुंच पाते हैं। अपना नेटवर्क कमजोर होने से मजबूरी में सीमांत के गांवों में बसे लोग संचार सेवाओं के लिए नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं। वर्तमान में पंचेश्वर में भारतीय कंपनी का कोई टावर नहीं है। हल्दू, तड़ीगांव, झूलाघाट, रणवा क्षेत्र के अलावा धारचूला के पांगला, बुंदी, गर्ब्यांग और कालापानी तक कोई नेटवर्क नहीं है। काली नदी किनारे बसे कुछ गांवों में बीएसएनएल के सिग्नल पहुंचते हैं लेकिन आए दिन सेवा बाधित होती रहती है। इन क्षेत्रों में अब जियो के टावर लगाए जा रहे हैं।
कोट
जिले के जिन क्षेत्रों में संचार सेवा नहीं है, वहां पर टावर लगाने के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संचार कंपनियों को जल्द टावर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। - रीना जोशी, डीएम, पिथौरागढ़।