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चीन सीमा के नजदीक से इनरलाइन हटाने पर जोर

Thu, 28 Jan 2016 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
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 आतंकी गतिविधियों के मद्देनजर एक बार फिर इनरलाइन चीन सीमा के पास से हटाने की मांग तेज हो गई है। लोगों ने पहले की तरह इनरलाइन जौलजीबी लाने में देरी नहीं करने की अपील केंद्र सरकार से की है।
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इनरलाइन छियालेख होने से धारचूला ही क्या 65 किमी आगे तक बेरोकटोक जा सकते हैं। यही लोगों को अब खतरा लगने लगा है।
वर्ष 1998 से पहले इनरलाइन चीन सीमा से 115 किमी दूर जौलजीबी में थी। वर्ष 1998 में इनरलाइन को धारचूला से 65 किमी दूर चीन सीमा की ओर छियालेख शिफ्ट कर दिया गया।
धारचूला से 30 किमी पहले जौलजीबी में बाहरी लोगों की चेकिंग होती थी। बाहरी लोगों को चीन सीमा में प्रवेश के लिए उप जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पास जारी किया जाता था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति चीन सीमा के बेहद करीब छियालेख तक बेरोकटोक जा सकता है। छियालेख से चीन सीमा लीपूपास की दूरी मात्र 20 किमी है।
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 हाल के वर्षों में चीन सीमा में कई बाहरी लोगों को पकड़ा जा चुका है, हालांकि उनके देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की पुष्टि नहीं हुई।
इनरलाइन छियालेख होने से धारचूला ही क्या धारचूला से 65 किमी दूर छियालेख तक पहुंचना आसान हो गया है। यह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
जब इनरलाइन जौलजीबी से हटाकर छियालेख की गई थी, उस समय स्थानीय लोगों ने ही इनरलाइन को चीन सीमा के पास स्थापित करने की मांग की थी। उस समय लोगों को लगता था कि जौलजीबी में इनरलाइन होने से लोग धारचूला आने में कतराते हैं, इससे वहां का व्यापार प्रभावित हो रहा है।
अब सीमांत के लोगों की समझ में राष्ट्र और क्षेत्र सुरक्षा की यह बात आ रही है। लिहाजा सीमांत के लोग इनरलाइन को पहले की तरह जौलजीबी लाने की मांग उठा रहे हैं। व्यापार मंडल अध्यक्ष भूपेंद्र थापा का कहना है कि इनरलाइन अंतरराष्ट्रीय सीमा से दूर ही होनी चाहिए। इस दिशा में भारत सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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