नर्मदेश्वर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश लेने वाले वनरावत बच्चे
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गरीबी और अभाव में जी रहे अस्कोट के औलतड़ी गांव के सात वनरावत बच्चों को यहां सुवाकोट स्थित मां कामाख्या नर्मदेश्वर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश दिया गया है। बच्चों को छह से आठ तक की कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए उनकी माताएं खुद विद्यालय पहुंची थीं। इन बच्चों को संस्कृत विद्यालय में प्रवेश दिलाने की पहल ग्राम प्रधान किशन सिंह पोखरिया ने की। इन बच्चों की इंटर तक की पढ़ाई का सारा खर्च विद्यालय की संस्थापक संतोषी माता ने उठाने का फैसला लिया है। इस आवासीय विद्यालय में बच्चों के भोजन, आवास और शिक्षा की व्यवस्था मुफ्त में रहेगी।
प्रधानाचार्य डा. सीएस जोशी ने बताया कि संतोषी माता ओड़िशा के कालाहांडी में भी आदिवासी बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। सुवाकोट के नर्मदेश्वर विद्यालय में भी यही प्रयास किया जा रहा है। वनरावतों के कुछ बच्चों में पढ़ने की ललक होती है, लेकिन गरीबी और अभावों के कारण उनको सही रास्ता नहीं मिल पाता।
औलतड़ी गांव के निखिल सिंह, मोहन सिंह रजवार, हरीश रजवार, कपिल रजवार, रमेश रजवार, कमान सिंह और त्रिभुवन सिंह का जब संस्कृत विद्यालय में प्रवेश हुआ तो सभी बच्चों के चेहरे में खुशी थी। प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय में अब इन बच्चों को संस्कृत में ही शिक्षा दी जाएगी। प्रधान किशन सिंह पोखरिया ने कहा कि बच्चों को विद्यालय में भेजकर उनको काफी खुशी मिली है।