बंगापानी में गरारी के सहारे गोरी नदी पार करते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
जिले के कई दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए आज भी काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। बंगापानी क्षेत्र के गांवों के बच्चे जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुंच रहे हैं। ग्रामीण रास्तों को ठीक करने की कई बार मांग उठा चुुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
बंगापानी कहने को तो तहसील है, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है। दो माह पहले बंगापानी से दारमा (आलम) तक करीब सात किमी सड़क कटिंग का कार्य शुरू हुआ। करीब आधा किमी सड़क काटने के बाद इसे अचानक छोड़ दिया गया। अधूरी सड़क कटिंग से रास्ते भी ध्वस्त हो गए। गोरी नदी में एनएचपीसी की ओर से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के आवागमन के लिए गरारी लगाई गई, लेकिन यह भी बदहाल पड़ी है। गरारी के एक हिस्से को खीरे (जंगली पौधा) के पेड़ में बांधा गया है जो कि बेहद कमजोर होता है। मुवानीदवानी जीआईसी में मुवानी और धामीगांव के करीब 30 बच्चे पढ़ाई करने जाते हैं।
परिजनों को जब तक शाम को बच्चे सकुशल नहीं पहुंच जाते, उनकी सुरक्षा का भय सताते रहता है। क्षेत्र के लीलाधर मिश्रा, हरक सिंह धामी, लाल सिंह धामी, नंदन सिंह, मोहनी देवी, मंजू देवी, हयात सिंह आदि ने बताया कि रास्ता टूटने से ग्रामीणों को काफी दिक्कत हो रही है। रास्ता ठीक करने के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। लोनिवि डीडीहाट के एई सरफराज ने बताया कि मशीन खराब होने से सड़क का काम बंद पड़ा है। एक-दो दिन के भीतर काम शुरू कर दिया जाएगा।
सड़क को तरस रहा वीर चक्र विजेता का गांव
पिथौरागढ़। वर्षों पहले जोरशोर से करीब 25 किमी लंबी मदकोट-दारमा रोड का कार्य शुरू किया। करीब आठ किमी तक ही सड़क बन पाई। इसके बाद सड़क निर्माण का कार्य रोक दिया। इस सड़क के बनने से जोशा, गोल्मा, ढुनामानी, आलम दारमा के ग्रामीणों को फायदा मिलता। आलमदारमा वीर चक्र विजेता स्व. दीवान सिंह धामी और आठ स्वतंत्रता सेनानियों का गांव है। बावजूद इसके ग्रामीण उपेक्षा से आहत हैं।