मुनस्यारी में बर्ड वाचिंग करते पक्षी विशेषज्ञ और स्कूली बच्चे
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हिमल कलासूत्र की ओर से आयोजित चार दिनी बर्ड फेस्टिवल का बुधवार को समापन हो गया है। इस अवधि में छह स्कूलों के 60 बच्चों के साथ बर्ड वाचरों ने 100 से ज्यादा तरह के पक्षियों को करीब से देखा। इस बार कई दुर्लभ पक्षी निचले इलाकों में भी नजर आए। इनमें पाइड थ्रश, व्हाइट टेल्ड रोबिन, नेपाल फुलवेटा, ग्रेटर यलोनेप, वुडपैकर, एशियन कोयल आदि शामिल हैं।
मुनस्यारी के सरमोली, शंखधूरा, पापड़ीधार, बलाती में चले बर्ड वाचिंग कार्यक्रम के दौरान पक्षी विशेषज्ञ आशीष कोठारी और डा. शांतिराम ने कहा कि पक्षियों का व्यवहार पर्यावरण संतुलन का संकेत देता है। वह कहते हैं कि पक्षियों के संरक्षण के प्रति व्यापक चेतना के विकास की जरूरत है। यदि लोग प्रकृति का संरक्षण करें तो सदियों तक पक्षियों की चहचहाट सुनाई देगी। कार्यक्रम का समापन करते हुए विधायक हरीश धामी ने कहा कि मुनस्यारी का पर्यटन व्यवसाय सिर्फ प्रकृति के सहारे ही संचालित होता है।
यहां पर स्नो स्कीइंग, बर्ड वाचिंग, माउंटेनियरिंग, ट्रैकिंग की अपार संभावनाएं हैं। लोगों को इनके संरक्षण के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। कार्यक्रम संयोजक मल्लिका विर्दी ने बताया कि पिछले सात वर्ष से लगातार सरमोली गांव में हिमल कलासूत्र के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस मौके पर बर्ड वाचर रेखा रौतेला, त्रिलोक राणा, रामनारायण, राजू कोरंगा आदि लोग थे। इस कार्यक्रम में वन विभाग, माटी, कल्पवृक्ष जैसी संस्थाओं ने सहयोग दिया।
चार दिन के बर्ड वाचिंग के बाद निष्कर्ष में कहा गया कि गोरी नदी के घाटी वाले इलाके में पक्षियों का अद्भुत संसार है। कहा गया कि मुनस्यारी और अस्कोट अभ्यारण्य में पक्षियों की 333 प्रजातियां हैं। इनमें अब कई दुर्लभ की श्रेणी में आ गई हैं।