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आपदाग्रस्त बस्तड़ी में खतरे में पड़ा बचपन

Tue, 05 Jul 2016 10:34 PM IST
संजू पंत/अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट
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खतरे में बचपन - फोटो : अमर उजाला
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आपदाग्रस्त बस्तड़ी में बचपन के खतरे में पड़ने का डर पैदा हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों को इस समय माता-पिता की जरूरत है, लेकिन वह आपदा का शिकार हो गए हैं। बस्तड़ी में अब बच्चों की किलकारी नहीं गूंजती। किसी आंगन में शाम के समय क्रिकेट खेलने वाले बच्चे नहीं दिखते। आम के पेड़ों पर चढ़कर फल तोड़ने वाले शरारती बच्चों के चेहरे की मुस्कान गायब है। गिल्ली, डंडा खेलने वाले बच्चे नहीं नजर आते। ऐसा लगता है, अब बस्तड़ी में बचपन कभी नहीं लौटेगा। समूह में खेलने वाले बच्चे नजर नहीं आएंगे।
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बस्तड़ी में सबसे बड़ी त्रासदी स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए हो गई है। एमएससी फाइनल में पढ़ने वाले मनोज भट्ट एवं एमए फाइनल में पढ़ने वाली उनकी जुड़वां बहन ममता की माता इंदु भट्ट और पिता जगदीश भट्ट हादसे का शिकार हो गए। अब दोनों भाई-बहनों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मनोज रोते हुए कहते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद कंपटीशन की तैयारी का इरादा किया था। पिताजी इसके लिए पूरा सहयोग देने की बात करते थे, लेकिन अब सारे सपने चूर गए हैं। ममता की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे हैं। वह कहती है कि भविष्य चौपट हो गया है।

कक्षा पांच में पढ़ने वाले हर्षित और कक्षा एक में पढ़ने वाले विक्की के पिता रघुवर दत्त हादसे का शिकार हुए हैं। दोनों बच्चे अपनी मां के साथ राहत कैंप में हैं। घटना के दिन से बच्चों का स्वभाव बदल गया है। वह बार-बार पिता को याद करते हैं। आपदा के समय लापता माया दत्त के दो बच्चों 14 साल की मानसी और 12 साल के हर्षित के सामने भी ठीक यही स्थिति है। दोनों बच्चों ने बताया कि कापी-किताब सभी मलबे में दब गए हैं, जिस रात घटना हुई उसके ठीक अगले दिन स्कूल खुलने वाला था। बच्चों ने स्कूल जाने की पूरी तैयारी की थी।
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