जिला मुख्यालय तथा उससे सटे गांवों में चिकन पाक्स रोग फैला है। स्थानीय लोग इस रोग को काकड़ा कहते हैं। इस रोग में मरीज को तेज बुखार आता है और शरीर में दाने निकलने लगते हैं। यह दाने फूटने पर उनमें जलन होने लगती है। रोग के संक्रामक होने के कारण लोग भयभीत हैं। जिला मुख्यालय से सटे सेरा गांव में तीन चार लोग चिकन पाक्स से पीड़ित हैं। इसके अलावा घाटी वाले गांवों में भी इस रोग की चपेट में कई लोग आ गए हैं। बताया गया है कि पिछले एक हफ्ते से इस रोग के लक्षण ज्यादा दिखाई दिए हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस डिजीज है और इस मौसम में चिकन पाक्स का वायरस तेजी से सक्रिय होता है। इन दिनों तापमान की असमानता बनी रहती है। किसी समय तेज गर्मी तो अचानक ठंड का असर भी होने लगता है। यह वायरस हवा के माध्यम से फैलता है। रोग के पकड़ने के बाद तत्काल इलाज शुरू करने पर यह एक हफ्ते में ठीक होता है। यदि लापरवाही की गई तो रोग के बिगड़ने की संभावना रहती है। शरीर में निकलने वाले दाने पकने लगते हैं। तब स्थिति गंभीर होने लगती है। जिला अस्पताल के पैथालाजिस्ट डा. नरेंद्र शर्मा का कहना है कि बुखार और शरीर में दाने निकलने जैसे लक्षण सामने आने पर तत्काल अस्पताल से संपर्क किया जाए। जिला अस्पताल में चिकन पाक्स से निपटने के लिए पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था है और ज्यादा गंभीर रोगियों के लिए वैक्सीन का इंतजाम भी किया गया है।
रोग में यह सावधानी की जाए
चिकन पाक्स तेजी से संक्रमण होने वाली बीमारी है।
मरीज के संपर्क में किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं आना चाहिए।
मरीज के उपयोग किए गए साबुन, तौलिया का उपयोग परिवार का अन्य सदस्य न करे।
यदि चिकन पाक्स के दौरान सर्दी, जुकाम पकड़ जाए तो तत्काल डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
बुखार कम करने के लिए पैरासिटामोल लिया जाए।
चिकन पाक्स का प्रभाव कम करने के लिए वैक्सीन लगाई जाए।