सौन पट्टी का प्रसिद्ध चौपख्या मेला हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया है। मेले में करीब 25 हजार से अधिक लोगों ने चौमू देवता का आशीर्वाद लिया। पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग पूजा-अर्चना करने मंदिर पहुंचे। शांति व्यवस्था के लिए भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया था।
मूनाकोट ब्लॉक के रियासी ग्रामसभा में लगने वाले चौपख्या मेले में सोमवार सुबह से ही लोग मंदिर में पूजा करने के पहुंचने लगे। मंदिर के आचार्य रमेश चंद्र पुनेठा ने बताया प्राचीन काल में यहां से सात ऋषि तीर्थ यात्रा के लिए निकले। एक जगह गाय मरने पर उनमें से एक ने उसकी अंत्येष्टि की। तब से अंत्येष्टि करने वाले ऋषि का तिरस्कार किया जाने लगा। तभी से पंचेश्वर, चमदयौल, धामीकूड़ा, चौपख्या, नेपाल, गुमदेश और एक अन्य स्थान को चैमूदेवता (शिव) के रुप में पूजा जाता है।
उन्हीं में से चौपख्या मंदिर के चार मुंह जो चार खामों में टिके हैं पूजा की जाती है। यह मंदिर देवदार के पेड़ों के बीच रमणीक स्थल में है। मंदिर के अंदर जलाशय भी है। जहां से ठंडे में गरम और गर्मियों में ठंडा पानी आता है। मंदिर में तल्ली रियांसी, मड़ेगांव, चौपख्या, झौलाखेत, लांगड़ी और मल्ली रियासी के खड़ायत लोग ही कर्ताधर्ता होते हैं।
मंदिर में कभी एक तो कभी दो डोले निकलते हैं। इस बार तल्ली रियांसी से ही डोला आया। डंगरिया त्रिलोक सिंह खड़ायत ने चॅवर हिलाते हुए भक्तों को अन्न-धन का आशीर्वाद दिया। मंदिर में नवरात्र में नौ दिन जागरण के बाद नवमी के दिन मेला लगता है। सुरक्षा व्यवस्था के लिये एसपी रामचंद राजगुरु खुद मौजूद रहे। मेले में पूर्व विधायक मयूख महर, कुंडल महर, नरेंद्र सौन मेला समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह खड़ायत, टाईगर खड़ायत, कमलेश खड़ायत, कैलाश खड़ायत, श्याम सिंह, भुवन जोशी, केशव दत्त जोशी, गोविंद सिंह समेत हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।