पिथौरागढ़। पहरू पत्रिका की ओर से आयोजित 15 वें राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन शगुन आखर के साथ शुरू हो गया है। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री विधायक बिशन सिंह चुफाल और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। चुफाल ने कहा कि हमने अपनी दैनिक जीवन में कुमाऊंनी में ही बातचीत करनी चाहिए। संयोजक डाॅ. अशोक पंत ने कहा कि कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुमाऊंनी भाषा का प्रचार-प्रसार और संरक्षण करना है।
संरक्षक डाॅ. हयात सिंह रावत ने कहा कि हमें अपनी दुदबोली को बचाने के लिए लिपि और गढ़वाली, कुमाऊंनी आदि सभी पूर्वाग्रहों को छोड़कर इसे नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाना होगा। विशिष्ट अतिथि जसविंदर कौर ने उत्तराखंड भाषा संस्थान की ओर से कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण, संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। कमला पंत ने भाषा विज्ञान पर प्रकाश डालते हुए कुमाऊंनी भाषा के इतिहास, उप बोलियों पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डाॅ. दीपा गोबाड़ी के कविता संग्रह उजास और भारती पांडे की पुस्तक चौसात का विमोचन किया गया।
प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि कुमाऊंनी को शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करके इसका साहित्यिक विकास करना होगा। जनार्दन उप्रेती के संचालन में यहां वरिष्ठ पत्रकार बीडी कसनियाल, चारु तिवारी, देव सिंह पिलख्वाल, पद्मश्री बसंती देवी, मोहन जोशी, गजेंद्र सिंह बोरा, डाॅ. आनंदी जोशी, महेंद्र ठकुराठी, डाॅ. पीतांबर अवस्थी, महेश पुनेठा, चिंतामणि जोशी आदि मौजूद रहे।
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स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाए
पिथौरागढ़। कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में स्थानीय उत्पाद, ऐपन, कलाकृतियां, ऐतिहासिक सामग्री, लिखित भोजपत्र, ताम्रपत्र, वाद्य यंत्र, पुस्तक प्रदर्शनी आदि के स्टाॅल भी लगाए गए हैं। राजकीय कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय कमतोली की ओर से स्टाल लगाकर शगुन आंखर, बच्चों की दीवार पत्रिका, कुमाऊंनी हस्तशिल्प आदि की जानकारी लोगों को दी जा रही है। संवाद