लोहाघाट (चंपावत)। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गौरा महोत्सव की धूम रही। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर मां गौरा-महेश्वर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। नेपाल सीमा से लगे जिंडी, लुपड़ा, निडिल, सुनकुरी, जुजरी और नर्सो गांवों में भी गौरा पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया।
नेपाल सीमा क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों ने अपने इष्ट देवताओं के सम्मुख कृष्ण जन्म और कौरव-पांडव और महाभारत की कथाओं पर आधारित पारंपरिक गीतों का गायन किया। हिडंबा मायावी राक्षसी बोलन लागी, मैं संग ब्याह कर लिए, भीम सिंह योद्धा है गया तैयार, राक्षस सेना में मची खलबली, है गयो तनरो युद्ध और भीम सिंह ले मारी हालो राक्षस वीर जैसे लोकगीतों के गायन से वातावरण भक्तिमय हो गया।
क्षेत्र में चाली, धुमारी, झोड़ा और चाचरी गीतों की भी धूम रही। जिंडी गांव स्थित गौरा मंदिर में पुरोहित मदन कलौनी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस दौरान पुष्पा कलौनी, रीता देवी, हेमा देवी, पार्वती देवी, दीपा देवी, सुनीता देवी, निशा देवी, सीमा देवी, रेखा देवी, नीमा सहित कई महिलाएं मौजूद रहीं।
खोल दे माता खोल भवानी धरम किवाड़...
ग्राम पंचायत सुई-पऊ गांव में गौरा महोत्सव के समापन पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां गौरा और महेश को विदाई दी। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक झोड़े गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। बाराकोट ब्लॉक के नौमाना गांव स्थित गौरा खल में आयोजित गौरा महोत्सव के दौरान महिलाओं ने गौरा दीदी तू जाली पंयाला घर, बैना हम कसि कै रूला और खोल दे माता खोल भवानी धरम किवाड़ समेत विभिन्न पारंपरिक झोड़ों का गायन किया। गीतों के माध्यम से महिलाओं ने मां गौरा के प्रति अपनी श्रद्धा और भावनाएं व्यक्त कीं। यहां तुलसी देवी, सुनीता जोशी, जानकी देवी, बसंती देवी, भागीरथी देवी और धनी देवी आदि महिलाएं मौजूद रहीं।