मूनाकोट (पिथौरागढ़)। ब्लॉक के छह गांवों को पानी देने वाली गूल(छोटी नहर) ढाई साल से टूटी है। नहर टूटने से फसल के समय गांव के लोगों को रोपाई करने के लिए पानी नहीं मिल पाता है। ग्रामीण हर साल चंदा कर जगह-जगह टूटी गूल की मरम्मत करते हैं। गांवों में सुविधाओं के अभाव में पलायन होता जा रहा है।
इस कारण अधिकांश गांव खाली होते जा रहे हैं। सरकार ग्राम पंचायत को फंड तो दे देती है। पंचायत इस फंड को मूलभूत सुविधाओं में न लगाकर खड़ंजे बनाने में खपा देती है। मूनाकोट ब्लॉक के गंगा श्री ग्रामसभा में लघु सिंचाई विभाग ने गूल का निर्माण कराया। निर्माण के बाद गूल के रखरखाव की जिम्मेदारी ग्रामसभा को दी गई।
ग्रामसभा ने भी कभी इस गूल की मरम्मत पर एक पाई भी खर्च नहीं किया। इससे मलार, भैटासेरा, भैटाधानिक, हरड़ी ओर गरुड़ी गांव के लोगों को आज भी सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण हर साल लघु सिंचाई विभाग को योजना की मरम्मत के लिए मांगपत्र भेजते हैं।
विभाग मरम्मत के लिए मद न होने की बात कह कर टाल देता है। क्षेत्र पंचायत सदस्य गोविंदकृष्ण पांडे ने बताया लंबे समय से गूल टूटने के कारण योजना के पानी को किसी ने मत्स्य तालाब में डाल दिया है। उन्होंने विभाग से शीघ्र योजना के मरम्मत की मांग की है।
क्षेत्र में को पानी की अधिक जरूरत
मूनाकोट (पिथौरागढ़)। गंगाश्री ग्रामसभा घाटी वाले क्षेत्र में हैं। गर्म इलाका होने के कारण यहां अच्छी पैदावार होती है। पानी न होने से यहां होने वाली धान ओर मौसमी सब्जियों का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। इस कारण गांव के कई परिवार रोजगार के लिए यहां से पलायन कर चुके हैं।
ग्रामसभा में बनी गूल की मरम्मत के लिए नाबार्ड योजना से प्रस्ताव भेजा है। योजना के पानी को मत्स्य तालाब डालने की शिकायत मिली है। जल्द ही वे क्षेत्र में जाकर मामले की जांच पड़ताल करेंगे।
प्रदीप नेगी, अपर सहायक अभियंता, लघु सिंचाई, मूनाकोट।