जौलजीबी पहुंचे नेपाल के हुमली-जुमली के घोड़े। अमर उजाला
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धारचूला(पिथौरागढ़)। जौलजीबी मेले में नेपाल के हुमली-जुमली से एक महीने का पैदल सफर कर पहुंचे घोड़ा व्यापारी मायूस हैं। खरीदार नहीं होने से पिछले तीन दिन में एक भी घोड़ा नहीं बिक पाया है।
हुमली-जुमली से प्रतिवर्ष जौलजीबी मेले में घोड़े बेचने के लिए लाए जाते हैं। यहां के घोड़े उम्दा नस्ल के माने जाते हैं। कभी यह घोड़ा जौलजीबी मेले का मुख्य आकर्षण होता था। पहले बड़ी संख्या में हुमली-जुमली के घोड़ों की खरीदारी होती थी। भारतीय व्यापारी और अन्य लोग इस घोड़े के मेले में पहुंचने का इंतजार करते थे। इन घोड़ों को खरीदने के लिए मैदानी क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते थे लेकिन पिछले एक दशक से घोड़ों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। सतर साही, चंद्र सिंह, शंकर विडोला, कर्ण विडोला आदि लोग 45 घोड़े लेकर मेले में पहुंचे हैं।
नेपाल के मैदान में घोड़ों को रखा गया है। घोड़े के मालिकों ने बताया कि 19 नवंबर से अभी तक एक भी घोड़ा नहीं बिका है। मेले में पिछले 10 सालों से आ रहे सतर साही और चंद्र सिंह ने बताया कि अधिकांश भारतीय गांवों में सड़क पहुंच जाने से लोगों ने घोड़े खरीदना कम कर दिया है। बताया कि बोझा ढोने वाले घोड़े 30 हजार और सवारी वाले की कीमत 50 हजार से एक लाख रुपये तक है। कुछ समय पूर्व तक मेले में हुमली-जुमली के घोड़ों की काफी मांग थी। मुनस्यारी से भी व्यापारी 25 घोड़े लेकर पहुंचे हैं। वह भी इनके नहीं बिकने से परेशान हैं। व्यापारियों का कहना है कि घोड़ों की मांग कम होने के चलते उन्हें भविष्य में यह पेशा छोड़ना पड़ सकता है।