इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि राज्य गठन के बाद डीडीहाट से कई शहरों को जाने वाली रोडवेज की बसों का संचालन पूरी तरह बंद हो गया है। यूपी के समय में डीडीहाट से दिल्ली, टनकपुर और बरेली के लिए रोडवेज की बसों का संचालन बिना किसी रुकावट के 1999 तक होता रहा। तब यूपी के पास बसों की कोई कमी नहीं थी।
राज्य बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार आएगा, लेकिन सरकार ने एक-एक कर बसों का संचालन बंद कर दिया। रोडवेज की बसें बंद होने का नुकसान यह हुआ कि लोगों को मजबूरी में प्राइवेट वाहनों से सफर करना पड़ रहा है।
बताया गया कि टनकपुर, दिल्ली और बरेली को चलने वाली बसों का सबसे बड़ा फायदा सेना में कार्यरत जवानों को होता था। उनको इन बसों में ही रेलवे का भी रिजर्वेशन मिल जाता था। आज स्थिति यह है कि डीडीहाट से रोडवेज की कोई बस सेवा नहीं है। इस रूट से एकमात्र बस दिल्ली से धारचूला के लिए चलती है, लेकिन उसमें भीड़ इतनी रहती है कि डीडीहाट से बैठने वालों को सीट नहीं मिल पाती।
रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने से बुजुर्ग यात्री मुफ्त सफर का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ योजना का यहां के लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। डीडीहाट यूथ सोसाइटी, युवा शक्ति, व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अतिशीघ्र डीडीहाट से देहरादून और दिल्ली के लिए रोडवेज बस सेवा का संचालन किया जाए।