रोडवेज के पिथौरागढ़ डिपो की सेवाएं चौपट हो गई हैं। रविवार को टायरों के अभाव में 15 बसें वर्कशॉप में खड़ी रही। स्थिति यह है कि दिल्ली, देहरादून, बरेली, टनकपुर के लिए बसों का मिलना मुश्किल हो गया है। ठीक पर्यटन सीजन में रोडवेज की इस हालत से कर्मचारी नेता भी परेशान हैं। रविवार को स्टेशन में यात्रियों की भारी भीड़ जमा थी, लेकिन बसें न होने से यात्रियों को दिक्कत उठानी पड़ी। दिल्ली के लिए दोपहर में यहां से चार बसें जाती हैं, लेकिन रविवार को सिर्फ एक ही बस जा पाई। उसमें सीट पाने के लिए यात्रियों का रेला उमड़ गया।
रोडवेज के स्थानीय डिपो को हर माह 62 टायरों की जरूरत होती है, लेकिन दो माह बाद पिछले दिनों मात्र 40 टायर यहां पहुंचे। अब स्थिति इतनी खराब हो गई है कि लोगों को शेड्यूल के अनुसार किसी भी शहर के लिए बस मिलना संभव नहीं है। बताया गया कि तकनीकी खराबी से भी रोजाना दस बसों को खड़ा करना पड़ता है। यात्रियों के दबाव के कारण रोडवेज के अधिकारी इतना बड़ा रिस्क ले रहे हैं कि दिल्ली से सुबह यहां पहुंचने वाली बस को ही उसी समय दिल्ली के लिए वापस दौड़ाया जा रहा है, जबकि नियमानुसार लंबे रूट की बस को एक दिन मरम्मत के लिए रोका जाता है।
रोडवेज के सहायक महाप्रबंधक दीपक मेहरा ने स्वीकारा कि टायरों की कमी से बसों के संचालन में दिक्कत आ रही है। इधर, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेता एमएस जेठी और मोहन सिंह भंडारी का कहना है कि उच्चाधिकारी इस डिपो की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन में बसों की संख्या बढ़ने के बजाए यहां पर बसों का संचालन कम होता जा रहा है।
बसें रुकने से रोजाना 1.5 लाख का नुकसान
रोडवेज की लंबे रूट की बस एक दिन में कम से कम दस हजार रुपये की आमदनी करती है। एक दिन में टायरों के बिना 15 बसों के खड़े होने से रोजाना यह नुकसान 1.5 लाख रुपये का हो रहा है। अधिकारियों को इस नुकसान की कोई चिंता नहीं है। पहली बार रोडवेज के इस डिपो में इतनी खराब नौबत देखने में आई है।