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बस्तड़ी का अस्तित्व समाप्त नहीं होगा

Mon, 25 Jul 2016 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट (पिथौरागढ़)
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बस्तड़ी का अस्तित्व समाप्त नहीं होगा - फोटो : अमर उजाला
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आपदा प्रभावित बस्तड़ी में सोमवार को एक उम्मीद की किरण जागी। लोक निर्माण विभाग ने प्रभावित लोगों के जानवरों के रहने के लिए 35 टिनशेड बनाने का काम शुरू कर दिया है। यह टिनशेड उसी स्थान पर बनाए जा रहे हैं जहां पर प्रभावित लोग राहत कैंपों में रह रहे हैं।
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अब जानवरों के रहने की समस्या समाप्त हो जाएगी। लोगों की उम्मीद है कि धीरे-धीरे सरकार मकानों का निर्माण भी करेगी। गांव के लोग सिंघाली के पास स्थित अपनी नाप जमीन और वन पंचायत की जमीन पर ही रहना चाहते हैं। तबाह हो चुके बस्तड़ी के लोगों का साहस आज फिर बढ़ा है। उन्होंने अपने सभी प्रवासी लोगों से कहा है कि वह बस्तड़ी को फिर से बसाने में सहयोग दें। सरकार से आग्रह किया गया है कि जल्दी से मकानों का निर्माण शुरू करे।

लोनिवि के अधिशासी अभियंता एबी कांडपाल ने बताया कि जानवरों के लिए 35 टिनशेड तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विधायक मयूख महर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत और जिला पंचायत सदस्य प्रकाश जोशी ने जो रिपोर्ट तैयार कर शासन को दी है उसमें यही कहा गया है कि गांव के अधिकांश लोग वन पंचायत की जमीन पर रहने के इच्छुक हैं। 
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अब युवाओं की टीम तैयार करेंगे
बस्तड़ी। बस्तड़ी निवासी शंकर दत्त भट्ट का कहना है कि बस्तड़ी को फिर से बसाने के लिए युवाओं की टीम तैयार करेंगे। उनको यह समझाया जाएगा कि पुश्तैनी विरासत को फिर से संजोया जा सकता है। युवाओं में से अधिकांश इस पक्ष में हैं कि फिर से गांव को बसाया जाना चाहिए। तभी सामाजिक ताने बाने को फिर से पिरोया जा सकता है। 

साहस करने से सब कुछ संभव
बस्तड़ी। बस्तड़ी निवासी चंद्रबल्लभ भट्ट कहते हैं कि साहस करने से सब कुछ संभव है। यदि लोग इलाका ही छोड़ देंगे तो मृतकों की आत्मा ज्यादा परेशान होगी। सबसे अच्छी बात तो यही होगी कि लोग फिर से गांव का अस्तित्व लौटाने का प्रयास करें। अब ज्यादा दुख और संशय में पड़ने से कुछ हासिल नहीं होगा। 

संस्कृति को जिंदा रखना जरूरी
बस्तड़ी। लक्ष्मीदत्त भट्ट की राय और ज्यादा असरकारक है। वह कहते हैं कि दुनिया में प्राकृतिक आपदाओं से कई शहर, बस्तियां समाप्त हो जाती हैं लेकिन संस्कृतियों को जिंदा रखने का संघर्ष हमेशा जारी रहता है। वह कहते हैं कि किसी इलाके को छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं है। लोग सुरक्षित जगह पर बसने का मन बनाएं

धैर्य से करें स्थितियों का मुकाबला
बस्तड़ी। बस्तड़ी निवासी पुष्करराज भट्ट कहते हैं कि लोगों का मन धीरे धीरे बदलेगा। सरकार मदद करेगी तो जल्दी ही बस्तड़ी आबाद हो जाएगा। वह कहते हैं कि प्रकृति के सामने किसी का बस नहीं चलता। मनुष्य को धैर्य के साथ स्थितियों का मुकाबला करना चाहिए। क्या पता आने वाला समय इस दुख को उबरने का माध्यम बने। 
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